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सर्वकोश
रतिरहस्य: असली कोकशास्त्र (पण्डित कोक्कोक - कामकला, दाम्पत्य-जीवन एवं सम्पूर्ण रति-विज्ञान)

रतिरहस्य: असली कोकशास्त्र (पण्डित कोक्कोक - कामकला, दाम्पत्य-जीवन एवं सम्पूर्ण रति-विज्ञान)

Rati Rahasya or Asli Koka Shastra of Kokkoka with Hindi Commentary

पण्डित कोक्कोक (भाषा टीकाकार: पण्डित कन्हैयालाल) द्वारा

DevanagariHindipublished440 पृष्ठ

पृष्ठ 61, कुल 440 में से

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६२ असली कोकशास्त्र
जब विद्या से प्रकाशित और मृगचर्मादि धारण कर,
दीक्षित होके (दीर्घश्मश्रुः) ४० वर्ष तक दाढ़ी मूँछ आदि
पंच केशों का धारण करने वाला ब्रह्मचारी होता है, तब वह
पूर्व समुद्ररूप ब्रह्मचर्यानुष्ठान को पूर्ण करके गुरुकुल से उत्तर
समुद्र अर्थात् गृहाश्रम को शीघ्र प्राप्त होता है। वह सब लोगों
को संग्रह करके बराबर पुरुषार्थ और जगत को सत्योपदेश से
आनन्दित कर देता है।
जिस प्रकार पुरुषों को ब्रह्मचर्य और सविद्याओं के धारण
करने का अधिकार वेद में है, उसी प्रकार स्त्रियों को भी वेद की
आज्ञा है कि—
ब्रह्मचर्येण कन्या युवानं विन्दते पतिम् ॥ अथर्व ॥
ब्रह्मचर्यपूर्वक कन्या युवा-पति को प्राप्त करती है।
स्त्री और पुरुष दोनों जब समान बल-वीर्य और विद्यादि
शुभ गुण कर्मों से युक्त हों तब वे विवाह के योग्य होते हैं।
इस मन्त्र में कैसा उत्तम युवा-युवती का परिणय काल कहा
गया है।
तमस्मेरा युवतयो युवानं मर्मृज्यमानाः परियन्त्यापः।
स शुक्रेभिः शिक्वभी रेवदस्मे दीदायनिद्यमो घृतनि-
र्णिगप्सु ॥ ऋग्वेद ॥
अर्थ—जो (मर्मृज्यमानाः) उत्तम ब्रह्मचर्य व्रत और
सद्विद्याओं से अत्यन्त (प्रवतयः) बीसवें वर्ष से चौबीसवें