रतिरहस्य: असली कोकशास्त्र (पण्डित कोक्कोक - कामकला, दाम्पत्य-जीवन एवं सम्पूर्ण रति-विज्ञान)
Rati Rahasya or Asli Koka Shastra of Kokkoka with Hindi Commentary
पण्डित कोक्कोक (भाषा टीकाकार: पण्डित कन्हैयालाल) द्वारा
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युक्त होके, पृथिवी में अनेक शुभ गुण कर्म और स्वभाव से
प्रकाशमान होता है ।
ब्रह्मचारी तीन समिधा लेकर गुरु के पास जाता है ।
उस समित्पाणि ब्रह्मचारी की कितनी सुन्दर उत्कृष्टता वेद में
कही है—
इयं समित्पृथिवी द्यौर्द्वितीयातान्तरिक्षं समिधा पृणाति
ब्रह्मचारी समेधा मेखलया श्रमेण लोकांस्तपसा-
पिपर्त्ति ॥ अथर्व ॥
तीनों समिधा उपलक्षण मात्र हैं । यथार्थतः पहली समिधा
से तात्पर्य है पृथिवी—अर्थात् भूगर्भ सम्बन्धी ज्ञान और दूसरी
से सूर्यलोक की गति-विधि का ज्ञान तथा तीसरी से अन्तरिक्ष
सम्बन्धी ज्ञान अर्थात् नक्षत्रादि सभी लोक लोकान्तरों के सम्बन्ध
रखने वाले ज्ञान को प्राप्त करने के लिये वह गुरु से प्रार्थना
करता है । गुरु की कृपा से जब वह सम्पूर्ण ज्ञानों से परिपूर्ण
हो जाता है तब वह स्वयं आनन्द पाता हुआ दूसरों को भी
आनन्दित करता है ।
ब्रह्मचर्येति समिधा समिद्धा कार्ष्ण