रतिरहस्य: असली कोकशास्त्र (पण्डित कोक्कोक - कामकला, दाम्पत्य-जीवन एवं सम्पूर्ण रति-विज्ञान)
Rati Rahasya or Asli Koka Shastra of Kokkoka with Hindi Commentary
पण्डित कोक्कोक (भाषा टीकाकार: पण्डित कन्हैयालाल) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें६० असली कोकशास्त्र
मध्यम ब्रह्मचारी—जो दो वेदों को सांगोपांग ब्रह्मचर्य्यपूर्वक
समाप्त करे।
निकृष्ट ब्रह्मचारी—जो एक वेद को सांगोपांग ब्रह्मचर्य्यपूर्वक
समाप्त करे।
ये तीनों प्रकार के क्रम से ४८, ३६, २४, वर्ष के ब्रह्मचारी
होते हैं। क्योंकि एक-एक वेद के पढ़ने में बारह-बारह वर्ष
व्यतीत होते हैं। इसी मन्त्र के भाव को लेकर महात्मा मनु ने
भी कहा है—
वेदानधीत्य वेदौ वा वेदं चापि यथाक्रमम् ।
अविप्लुत ब्रह्मचर्यो गृहस्थाश्रममाविशेत् ॥
अर्थ—अखण्ड ब्रह्मचर्य का पालन करते हुए सम्पूर्ण वेदों को
अथवा एक वेद को भी यथाक्रम पढ़कर गृहस्थाश्रम मे प्रवेश करे ।
उत्तम ब्रह्मचारी विद्वानों में बैठा हुआ कैसा प्रतीत होता है ।
तानि कल्पद् ब्रह्मचारी सलिलस्य पृष्ठे तपोतिष्ठत्त-
प्यमानः समुद्रे ।
सस्नातो बभ्रुः पिङ्गलः पृथिव्यां बहु रोचते ॥ अथर्व ॥
ब्रह्मचारी समुद्र के समान गंभीर, बड़े उत्तम व्रत ब्रह्मचर्य
में निवास कर, महातप को करता हुआ वेद-पठन, वीर्य निग्रह
आचार्य के प्रियाचरणादि कर्मों को पूरा कर, यथाविधि
सम्पूर्ण विद्या में स्नान करके विद्यार्थों की सुन्दरता से सौन्दर्य