रतिरहस्य: असली कोकशास्त्र (पण्डित कोक्कोक - कामकला, दाम्पत्य-जीवन एवं सम्पूर्ण रति-विज्ञान)
Rati Rahasya or Asli Koka Shastra of Kokkoka with Hindi Commentary
पण्डित कोक्कोक (भाषा टीकाकार: पण्डित कन्हैयालाल) द्वारा
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के साथ दम्पत्ति कितने आनन्दित दिखायी दे रहे हैं।
मन्त्रा ने कहा,—आपका कहना यथार्थ है। अब हम लोगों के
और जीवन के दिन ही कितने हैं। परमात्मा ने अब तक भी हम
पर कृपा नहीं की। इसमें परमात्मा का क्या दोष ? हमारा भाग्य
ही ऐसा है।
मन्त्री और महाराज में जिस समय उपरोक्त बातें हो रही थीं
ठीक उसी समय सामने से एक जटाधारी तपस्वी आते दिखाई
दिये। उनके हाथ में एक कमंडलु और पांव में खड़ाऊँ थीं।
ये महात्मा नदी के उस पार रहते थे। नदी का जल बहुत गहरा
न था। तपस्वी नदीतट पर आ पहुँचे। वे अधोदृष्टि किये आ रहे
थे। इस लिये उनकी दृष्टि इन दोनों पर नहीं पड़ी। तट पर पहुँचते
ही उन्हें दो व्यक्ति एक शिला के पास दिखायी दिये।
नजर चार होते ही महाराज ने झुककर प्रणाम किया। मन्त्री
ने भी उनका साथ दिया।
महात्मा ने आशीर्वाद देते हुए कहा,—राजन् ! आप यहाँ कैसे ?
कुशल तो है ?
महाराज ने नम्रतापूर्वक कहा, —परमात्मा की कृपा से सब
कुशल ही है।
महात्मा ने कहा,—सब कुशल ही है, इसके क्या माने ? आप
ऐसे उदास वचन क्यों बोल रहे हैं ?
महाराज ने कुछ उत्तर नहीं दिया। महात्मा ने मन्त्री जी से