रतिरहस्य: असली कोकशास्त्र (पण्डित कोक्कोक - कामकला, दाम्पत्य-जीवन एवं सम्पूर्ण रति-विज्ञान)
Rati Rahasya or Asli Koka Shastra of Kokkoka with Hindi Commentary
पण्डित कोक्कोक (भाषा टीकाकार: पण्डित कन्हैयालाल) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंअसली कोकशास्त्र ५६
पुत्र, माँ-बेटी, बहन-भाई चाचा-भतीजा स्त्री-पुरुष, जहाँ-तहाँ
सभी जगह ऐसा विरोध फैला हुआ है कि जिस किसी का
हक-बेहक छीन लेने के लिये प्राण की बाजी लगाये हुए हैं।
वेद का सच्चा उपदेश ग्रहण करने से भाई-भाई में भरत-राम,
पिता-पुत्र में दशरथ राम, स्त्री-पुरुष में सीता-राम, ऐसे-ऐसे अनेकों
दृष्टान्त वैदिक काल के इतिहास में पाये जाते हैं।
दाम्पत्य-जीवन में पदार्पण करने वाले स्त्री-पुरुषों की योग्यता
का वर्णन वेद में कैसा सुन्दर किया गया है।
आचार्य उपनयमानो ब्रह्मचारिणं कृणुते गर्भान्तः ।
तं रात्रीस्तिस्र उदरे बिभर्ति तं जातं द्रष्टुमभिसंयन्ति
देवाः ॥
आचार्य्य ब्रह्मचारी का उपनयन संस्कार कर गर्भ में रखता
है। तीन रात तक उसे उदर में रखकर उसका भरण-पोषण
करता है। उस ब्रह्मचारी को बड़े-बड़े विद्वान देखने के लिये
आते है।' 'गर्भ' 'उदर' और तीन रात्रि से तात्पर्य्य गुरुकुल के
नियमों में बँधकर उत्तम, मध्यम, निकृष्ट, अर्थात् विद्याव्रत-
स्नातक, व्रतस्नातक, विद्यास्नातक, तीनों प्रकार के ब्रह्मचर्यों
से है।
उत्तम ब्रह्मचारी—जो सम्पूर्ण वेदों को सांगोपांग ब्रह्मचर्य
व्रत का पालन करते हुए पूरा करे।