रतिरहस्य: असली कोकशास्त्र (पण्डित कोक्कोक - कामकला, दाम्पत्य-जीवन एवं सम्पूर्ण रति-विज्ञान)
Rati Rahasya or Asli Koka Shastra of Kokkoka with Hindi Commentary
पण्डित कोक्कोक (भाषा टीकाकार: पण्डित कन्हैयालाल) द्वारा
पृष्ठ 57, कुल 440 में से
संदर्भ में पढ़ें५८ असली कोकशास्त्र
पता नहीं लग जाता तबतक मनुष्य उसके ग्रहण व त्याग की
इच्छा नहीं कर सकता । अबतक वेदों के नाम पर जो-जो मन-
माने कानून बनाये गये, उनका भयंकर परिणाम देखकर ही
लोगों के मन में उनके प्रति घृणा पैदा हो गयी । अन्यथा यदि
शुद्ध वैदकी शिक्षा का परिज्ञान उन्हें हो जाय तो वे कभी भी
विमुख रहने को तैयार नहीं होंगे। अपितु ऐसा अपनायेंगे कि
अन्ध विश्वासी भी नाक रगड़ते रह जायेंगे । क्योंकि वे मान
लेना ही अपना उद्देश्य नहीं समझते प्रत्युत् उस पर अमल
करना भी अपना कर्त्तव्य समझते हैं। किसी कवि ने ठीक
कहा है —
शास्त्राण्यधित्यापि भवन्तिमूर्खाः,
यस्तु क्रियावान् पुरुषः स विद्वान् ।
सुचिन्तितं चौषधमातुराणाम्,
न नाममात्रेण करोत्यरोगम् ।
शास्त्रों को पढ़कर भी मनुष्य मूर्ख हैं, यदि वे पढ़े हुए के
अनुसार आचरण नहीं करते। जिस प्रकार रोग के लिये उत्तम
से उत्तम सोची हुई औषध नाम लेने मात्र से रोग को दूर
नहीं कर सकती, जब तक कि वह सेवन न की जाय । शास्त्रों
के वचन व्यर्थ हैं, जब तक उन पर आचरण न किया जाय ।
वेदों, को ठुकरा देने से ही आज भाई-भाई में विरोध पिता-