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सर्वकोश
रतिरहस्य: असली कोकशास्त्र (पण्डित कोक्कोक - कामकला, दाम्पत्य-जीवन एवं सम्पूर्ण रति-विज्ञान)

रतिरहस्य: असली कोकशास्त्र (पण्डित कोक्कोक - कामकला, दाम्पत्य-जीवन एवं सम्पूर्ण रति-विज्ञान)

Rati Rahasya or Asli Koka Shastra of Kokkoka with Hindi Commentary

पण्डित कोक्कोक (भाषा टीकाकार: पण्डित कन्हैयालाल) द्वारा

DevanagariHindipublished440 पृष्ठ

पृष्ठ 56, कुल 440 में से

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असली कोकशास्त्र ५७
तक का भी निषेध करते हैं और कड़वे सत्य को भी झूठ के
बराबर त्याज्य समझते हैं। फिर ऐसी उलटी व्यवस्था क्यों ?
जहाँ वीरविजेता धनुर्धर राम, कृष्ण, अर्जुन के समान हुए,
वहाँ आज भीरु, डरपोक, तन-बल क्षीण आर्य्य सन्तान क्यों
दिखायी दे रही है ? इसका कारण स्पष्ट यही दीखाता है कि
वे लोग उसी सजीवन-बूटी को पान किये थे जिसके बल को
देखकर ही महात्मा मनु ने उपरोक्त सिंह गर्जना की थी। मेरा
मतलब उस सजीवन-बूटी से नहीं जो यति लक्ष्मण की मूर्छा
दूर करने के लिये महाबली हनुमान द्वारा लायी गयी थी।
मेरा तात्पर्य वेदामृतमयी शिक्षा से है। जबतक उसका प्रचार
रहा तबतक भारतवर्ष सब देशों का गुरु बना रहा। जब से
वैदिक ज्ञान की अवहेलना होने लगी, तब से आर्य्य सन्तान की
दुर्गति होने में भी कमी नहीं रही। आर्य्य जाति के पतन का
मूल कारण वेदशास्त्रानुकूल आचार-विचार का परित्याग
मात्र है।
अँगरेजी सभ्यता में पले हुए मनुष्य वेद-शास्त्रों का नाम
सुनते ही नीम चढ़े करेले की भाँति मुँह बिगाड़ लेते हैं। उन्हें
धर्मशास्त्रों में श्राद्धा नहीं, विश्वास नहीं, यहाँ तक कि वेदादि
शास्त्रों के पढ़े-लिखे विद्वानों से भी बड़ी घृणा करते हैं। यथा-
र्थतः इसमें उनका कोई विशेष दोष नहीं। क्योंकि उन्हें उसका
महत्त्व ही मालूम नहीं। जबतक किसी वस्तु के गुण-दोष का