रतिरहस्य: असली कोकशास्त्र (पण्डित कोक्कोक - कामकला, दाम्पत्य-जीवन एवं सम्पूर्ण रति-विज्ञान)
Rati Rahasya or Asli Koka Shastra of Kokkoka with Hindi Commentary
पण्डित कोक्कोक (भाषा टीकाकार: पण्डित कन्हैयालाल) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंअसली कोकशास्त्र ५३
मन को बुरे कामों की ओर कभी भी बहकने न दे, क्षणिक आनन्द
के लिये गर्भाधान के अतिरिक्त अधिक पति-समागम न करे, ईश्वर-
पर दृढ़ विश्वास रक्खे। इस प्रकार के व्यवहार से रहकर जो
स्त्री तीसरे या चौथे दिन रजो-निवृत्ति होने पर शुद्ध स्नान करके
स्वच्छ वस्त्र पहन श्रृंगार आदि से सुसज्जित हो सन्तान की
कामना से पीछे कही गयी बातों पर विचार करके पति समागम
करती और गर्भ धारण करती है तथा प्राचीन ऋषियों के कथना-
नुसार आचरण करके गर्भ की रक्षा करती है, उसकी सन्तान
सर्वगुणसम्पन्ना, माता-पिता पर श्रद्धा-भक्ति रखनेवाली, सुन्दर
और संसार में प्रशंसा प्राप्त करने वाली अवश्य होता है, इस में
किसी तरह का सन्देह नहीं है।
यदि पुत्र की कामना हो तो स्त्री को आन्तरिक प्रेम-पूर्वक
अपने पति के मुखका दर्शन करना चाहिये अथवा जैसी सुन्दर
सन्तान की मन में लालसा हो उसी प्रकार के अत्यन्त सुन्दर
चित्र का अवलोकन करना चाहिये और उसका स्वरूप गर्भाधान
होने के समय तक अपने हृदय पर अंकित कर लेना उचित है।
उसे इतना ध्यान-पूर्वक देखना चाहिये कि आंखें बन्द कर लेने पर
भी वह चित्र ठीक-ठीक ध्यान में आ जाय। यदि कन्या की इच्छा
हो तो स्नान करने के बाद दर्पण में अपना मुख देखना चाहिये
अथवा किसी सुन्दरी स्त्री या स्त्री-चित्र को देखकर अपने हृदय में
अंकित कर लेना चाहिये।