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सर्वकोश
रतिरहस्य: असली कोकशास्त्र (पण्डित कोक्कोक - कामकला, दाम्पत्य-जीवन एवं सम्पूर्ण रति-विज्ञान)

रतिरहस्य: असली कोकशास्त्र (पण्डित कोक्कोक - कामकला, दाम्पत्य-जीवन एवं सम्पूर्ण रति-विज्ञान)

Rati Rahasya or Asli Koka Shastra of Kokkoka with Hindi Commentary

पण्डित कोक्कोक (भाषा टीकाकार: पण्डित कन्हैयालाल) द्वारा

DevanagariHindipublished440 पृष्ठ

पृष्ठ 51, कुल 440 में से

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पृष्ठ 51

५० असली कोकशास्त्र
देखने में भी आया है। जो भी हो, इतना तो अवश्य कहा जायगा
कि यह समय स्त्री के शान्तिलाभ करने का है और संसार
के दृश्यों से अपने चित्त को खींच कर अपने स्वामी के प्रेम में
एकाग्र करने का है। इसलिए ऋतु-स्नान के बाद पति का दर्शन
करना ही उचित है ।
एकान्तवास में बहुत से गुण हैं। सब से बड़ा लाभ इस से
यह होता है कि अनायास ही बहुत सी बुराइयों से छुटकारा मिल
जाता है। उत्तम सन्तान पैदा करने के लिए बुराइयों से दूर रहना
बहुत जरूरी है। लिखा है: -
आर्तवस्त्रावदिवसादहिंसा ब्रह्मचारिणी ।
शयीतदर्भशय्यायां पश्येदपि पतिं न च ॥
अश्रुपात नखच्छेद मभ्यंग मनु लेपनम् ।
नेत्रयारञ्जनं स्नानं दिवा स्वापं प्रधावनम् ॥
अत्युच्च शब्द श्रवणं हसनं बहुभाषणम् ।
व्यायासं भूमिखननं प्रवातं च विवर्जयेत् ॥
ऋतुकाल में हिंसा करने वाली स्त्री की सन्तान निर्दयी और
हिंसा करने वाली होती है। जो स्त्री इस समय ब्रह्मचर्य का पालन
नहीं करतो उस के गर्भ से पैदा होने वाला बालक मुर्ख, अल्पायु
और व्यभिचारी होता है। इस समय स्त्री को कुशा की शय्या पर
सोना चाहिए और अपने पति का मुख भी न देखना चाहिए ।
मिट्टी के बर्तन में अथवा पत्तल पर खटाई, मिर्च मसालों से