रतिरहस्य: असली कोकशास्त्र (पण्डित कोक्कोक - कामकला, दाम्पत्य-जीवन एवं सम्पूर्ण रति-विज्ञान)
Rati Rahasya or Asli Koka Shastra of Kokkoka with Hindi Commentary
पण्डित कोक्कोक (भाषा टीकाकार: पण्डित कन्हैयालाल) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें४ असली कोकशास्त्र ४६
रजस्वला के कर्त्तव्य
ऋतुकाल में स्त्रियों को बड़ी ही सावधानी से रहने की
आवश्यकता है । क्योंकि सन्तानोत्पत्ति का कार्य यहीं से आरम्भ
हो जाता है । जिस प्रकार बीज डालने से पहले खेत को दुरुस्त
किया जाता है, उसी प्रकार गर्भ धारण करने के पहले स्त्री को
अपना मन शान्त करना पड़ता है । शास्त्रकारों का वचन है कि
ऋतुकाल में स्त्री कोई भी कार्य न करे और एकान्तवास करे ।
एकान्त में रहने से मन में शान्ति आती है । जिस प्रकार प्लेट
लगे हुए 'केमरा' ( चित्र खींचने का यंत्र ) के सामने जो दृश्य
आता है, उसी का चित्र प्लेट पर अंकित हो जाता है, उसी
प्रकार ऋतुकाल से लेकर प्रसव पर्यन्त स्त्री के मन पर पड़े हुए
प्रभावों का सन्तान पर असर पड़े बिना नहीं रहता । स्त्री को
चाहिए कि वह तीन या चार दिन तक गृहस्थी के सब कामों से
अलग रहे और शान्तिपूर्वक अच्छी-अच्छी बातों पर विचार
करे । ऋतुकाल से निवृत्त होने के बाद स्नान करे और सब से
पहले अपने स्वामी का दर्शन करे । इस के बीच में उसे ऐसे ढंग
से रहना उचित है कि जिस में किसी की भी सुरत उसकी आँखों
के सामने न आवे । कुछ अनुभवी विद्वानों का कहना है कि
ऋतुस्नान के बाद स्त्री पहले-पहल जिसे देखती है, उसी के रूप
का बच्चा उसके गर्भ से उत्पन्न होता है । कई जगह ऐसा