रतिरहस्य: असली कोकशास्त्र (पण्डित कोक्कोक - कामकला, दाम्पत्य-जीवन एवं सम्पूर्ण रति-विज्ञान)
Rati Rahasya or Asli Koka Shastra of Kokkoka with Hindi Commentary
पण्डित कोक्कोक (भाषा टीकाकार: पण्डित कन्हैयालाल) द्वारा
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निकल जाता है। ठीक समय पर रजस्वला होनेवाली स्त्रियों
का चित्त हमेशा प्रसन्न रहता है और महीने-महीने स्राव
बन्द होने के बाद तो उनका काया-कल्प सा हो जाता है। उस
समय उनके चेहरे पर स्वाभाविक ही रौनक आ जाती है, शरीर
हल्का हो जाता है, चित्त में प्रसन्नता का समावेश हो जाता है
और हृदय में अपूर्व शान्ति का स्रोत बहने लगता है। इसी से
रजो-धर्म होने पर स्त्रियों को क्या करना चाहिए और क्या नहीं
इस बात की महर्षियों ने पूरी ताकीद की है; जो कि आगे चलकर
बतलाया जायगा। यह कोई ऐसी-वैसी चीज नहीं है कि इस
पर ध्यान न दिया जाय।
यह आर्त्तव रक्तमय स्राव है और गर्भाशय से निकलता है।
यह रक्त की भाँति शीघ्र नहीं जम सकता। इसका रंग लाल
और कुछ कालिमा लिये होता है। आर्त्तव का परिमाण सब स्त्रियों
में समान नहीं होता। अधिकतर इसका परिमाण एक छटाँक से
चार छटाँक तक होता है। वैद्यक ग्रन्थों ने एक दिन में इस से
अधिक या कम स्राव का होना भी रोग का चिह्न बतलाया है।
ऋतुमती रहने तक प्रायः स्त्रियों की शारीरिक और मानसिक
दशा में परिवर्तन हुआ करता है; आलस्य और अरुचि की
अधिकता रहती है, कमर नितम्ब और पेडू में भारीपन रहता है।