रतिरहस्य: असली कोकशास्त्र (पण्डित कोक्कोक - कामकला, दाम्पत्य-जीवन एवं सम्पूर्ण रति-विज्ञान)
Rati Rahasya or Asli Koka Shastra of Kokkoka with Hindi Commentary
पण्डित कोक्कोक (भाषा टीकाकार: पण्डित कन्हैयालाल) द्वारा
पृष्ठ 47, कुल 440 में से
संदर्भ में पढ़ें४६ असली कोकशास्त्र
१२-१३ वर्ष से लेकर ४५-५० वर्ष की आयु तक स्त्रियों
का मासिक-धर्म प्रतिमास जारी रहता है, बाद बन्द हो जाता है ।
फिर स्त्रियाँ गर्भ धारण नहीं कर सकतीं। इसे रजो निवृत्ति कहते हैं ।
हम पहले ही कह आये हैं कि मासिक-धर्म में ऋतु-स्राव की
अवधि कम से कम १ दिन और अधिक से अधिक ६ दिन है ।
तथा इससे अधिक स्राव का होना रोग का लक्षण है । किन्तु बहुधा
३-४ दिन ही स्राव होता है। यह मासिक-धर्म रजो-दर्शन होने
के बाद २८-३० दिन पर बराबर होता रहता है। अधिक मैथुन
से अथवा रोगी शरीर होने से आर्त्तव आगे पीछे भी होता है
किन्तु यह बड़ा ही हानिकारक है। मासिक-धर्म ठीक महीने
भर बाद होना तन्दुरुस्ती का लक्षण है, यों तो एक दिन आगा-
पीछा हो जाय तो बात दूसरी है। मासिक-धर्म की गड़बड़ी से
गर्भाशय भी विकार-युक्त हो जाता है । अतः ऐसी अवस्था में
उपचार करना बहुत ही आवश्यक है । बहुत सी स्त्रियों को
मासिक धर्म के समय कुछ पीड़ा होती है। यह भी रोग का लक्षण
है । मासिक-धर्म में जरा भी वेदना नहीं होनी चाहिए। बहुधा
स्त्रियाँ मूर्खता के कारण इस बात को जानती ही नहीं कि मासिक-
धर्म का निश्चित समय पर होना तथा उस समय एक प्रकार
की वेदना का होना भी कोई रोग है । और जो जानती भी हैं, वे
इस बात को प्रकट करने में संकोच करती हैं । किन्तु यह बहुत
बुरी बात है । मासिक-धर्म में जरा भी गड़बड़ी होने पर उन्हें