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सर्वकोश
रतिरहस्य: असली कोकशास्त्र (पण्डित कोक्कोक - कामकला, दाम्पत्य-जीवन एवं सम्पूर्ण रति-विज्ञान)

रतिरहस्य: असली कोकशास्त्र (पण्डित कोक्कोक - कामकला, दाम्पत्य-जीवन एवं सम्पूर्ण रति-विज्ञान)

Rati Rahasya or Asli Koka Shastra of Kokkoka with Hindi Commentary

पण्डित कोक्कोक (भाषा टीकाकार: पण्डित कन्हैयालाल) द्वारा

DevanagariHindipublished440 पृष्ठ

पृष्ठ 46, कुल 440 में से

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असली कोकशास्त्र ४५
जारी रहता है। यदि इसके बाद भी रज का निकलना बन्द
न हो तो मासिक धर्म का दोष समझना चाहिए। यह क्यों
निकलता है, यह जानने के लिए पाठक-पाठिकाओं का उत्सुक
होना स्वाभाविक है; बात यह है कि स्वाभाविक नियमानुसार
१२-१३ वर्ष की अवस्था में बालिकाओं के गर्भाशय के
भीतर रक्त का संचार हेना शुरू होता है। इन दिनों गर्भाशय का
मुख कुछ-कुछ खुल जाता है और रक्त योनि मार्ग से होकर
बाहर निकलता है। इसको मासिक-धर्म कहते हैं, क्यों कि यह
हर महीने में होता है। यह लाल रंग का ओर तरल होता है।
इसका पहले-पहल निकलना रजोदर्शन कहलाता है और बाद
उसका नाम ऋतु, आर्त्तव, रजस्वला या मासिक-धर्म हो
जाता है। यहाँ पर यह जान लेना आवश्यक है कि गर्भाशय का
योनि से क्या सम्बन्ध है, क्योंकि यह जाने बिना इस बात का
समझना असम्भव हो जायगा कि गर्भाशय से वह आर्त्तव किस
प्रकार बाहर निकलता है।
जब गर्भ-स्थिति हो जाती है, तब मासिक-धर्म बन्द हो
जाता है। कितनी ही स्त्रियों को गर्भ-स्थिति में भी मासिक-धर्म
होता रहता है, पर ऐसा बहुत कम देखने में आता है।
तद्वर्षाद्द्वादशात्काले वर्तमानमसृक्पुनः ।
परिपक्वशरीराणां याति पंचाशतः क्षयम् ॥