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सर्वकोश
रतिरहस्य: असली कोकशास्त्र (पण्डित कोक्कोक - कामकला, दाम्पत्य-जीवन एवं सम्पूर्ण रति-विज्ञान)

रतिरहस्य: असली कोकशास्त्र (पण्डित कोक्कोक - कामकला, दाम्पत्य-जीवन एवं सम्पूर्ण रति-विज्ञान)

Rati Rahasya or Asli Koka Shastra of Kokkoka with Hindi Commentary

पण्डित कोक्कोक (भाषा टीकाकार: पण्डित कन्हैयालाल) द्वारा

DevanagariHindipublished440 पृष्ठ

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५४ असली कोकशास्त्र
रजोदर्शन
इसका दूसरा नाम है मासिक-धर्म । भारत की स्त्रियाँ
साधारणतया १२-१३ वर्ष की अवस्था में ऋतुमती होती हैं ।
गर्म प्रान्तों में इससे कुछ पहले और ठंडे प्रान्तों में इससे कुछ
अधिक समय में स्त्रियाँ ऋतुमती होती हैं । किन्तु दुर्भाग्य की बात
है कि जहाँ शास्त्रकारों ने १६ वर्ष के पहले गर्भाधान करना निषेध
किया है, वहाँ ८-१० वर्ष की अवस्था में ही कितनी स्त्रियों को
गर्भ रह जाता है । इसका मूल कारण सामाजिक बुराई है ।
स्त्रियों तथा पुरुषों की अज्ञता के कारण ही यह अनर्थ होता है ।
बात यह है कि छोटी-छोटी कन्याओं को नीच पुरुष ऐसी बातें
सिखलाने लगते हैं और बड़ी उम्र की स्त्रियाँ भी कन्याओं के
सामने इस तरह की गोप्य बातें करने लगती हैं, जिसका
फल यह होता है कि लड़कियाँ उचित अवस्था से पहले ही
रजस्वला होने लगती हैं और कुसंगति में पड़कर दुराचारिणी
हो जाती हैं ।
मासेनोपचितं काले धमनोभ्यां तदार्तवम् ।
ईषत्कृष्णं विदग्धं च वायुर्योनिमुखं नयेत् ॥
महीने में एक बार स्त्रियों के गुह्यस्थान से एक प्रकार का
कुछ काला और दुर्गन्धयुक्त रक्त निकलता है, उसी को आर्त्तव
या ऋतु कहते हैं । इस रक्त का निकलना ३ से ६ दिन तक