रतिरहस्य: असली कोकशास्त्र (पण्डित कोक्कोक - कामकला, दाम्पत्य-जीवन एवं सम्पूर्ण रति-विज्ञान)
Rati Rahasya or Asli Koka Shastra of Kokkoka with Hindi Commentary
पण्डित कोक्कोक (भाषा टीकाकार: पण्डित कन्हैयालाल) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंअसली कोकशास्त्र ४२३
परस्पर विनोद से मन नहीं भरा तब किसी मित्र की प्रेरणा से
तवायफ का गाना सुनने चले गये । वहाँ तवायफ का व्यवहार
“बहेलिये” की तरह विचित्र फँसाने वाला होता है । मण्डली के
पहुँचते ही बड़े आवभगत के साथ बैठाना, बड़ी रसभरी मीठी
रसीली लच्छेदार बातों में फँसाकर गाना सुनाना और उन आँख
के अन्धे तथा गाँठ के पूरों का धन हरकर उल्लू बनाना उनका रोज
का कर्म है । इतना होने पर भी वे इतने नशे में चूर हो जाते हैं
कि घर की सुध-बुध छोड़कर अपना तन-मन-धन सब लुटा
बैठते हैं ।
इस लिए पत्नी को चाहिए कि जब पति सायंकाल घर आवे
तो उनका ऐसा मधुर शब्दों से स्वागत करे कि वे सब चिन्ताओं
को भूल जायें और जलपान आदि के पश्चात् गाने बजाने आदि के
विनोदात्मक कार्य करे । इस भाँति जब पति प्रसन्न रहेंगे तब वे
पत्नी को भी प्रसन्न करने में किसी प्रकार की त्रुटि नहीं रक्खेंगे
और कोई दुर्व्यसन भी उनमें नहीं आने पावेगा ।
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