रतिरहस्य: असली कोकशास्त्र (पण्डित कोक्कोक - कामकला, दाम्पत्य-जीवन एवं सम्पूर्ण रति-विज्ञान)
Rati Rahasya or Asli Koka Shastra of Kokkoka with Hindi Commentary
पण्डित कोक्कोक (भाषा टीकाकार: पण्डित कन्हैयालाल) द्वारा
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सौन्दर्य बर्द्धक योग
१—बच, धनियाँ, लोध, गोरोचन, समान भाग में पीसकर
मुख पर लगाने से यौवन की निकली हुई फुन्सियाँ नष्ट हो जाती हैं ।
२—मँगरैला, जीरा, पीली सरसों, काला तिल, सब बराबर
मात्रा में मिलाकर बकरो के दूध में पीसकर शरीर पर मलने से
उसकी सुन्दरता बढ़ती है, और मुँह की झाँयीं तथा मुहासे भी दूर
होते हैं ।
३—सफेद् सरसों, बिना भूसी के जौ का आटा, लोध की
छाल और मुलहठी इन सबको पीसकर मुख पर लगाने से मुख की
खूबसूरती बढ़ती है और खाल मुलायम होती है ।
४—अनार, शिरीष, अमलतास, नीम, हलदी और लोध की
छाल, मिलाकर उबटन करने से स्त्रियों की मुखश्री बढ़ती है ।
५—मुलहठी, कचनार, सहदेवी, पके बढ़ के पत्ते, कमल,
सफेद चन्दन, लोध की छाल, लाही और कुङ्कुम इन सबको समान
भाग में लेकर जल के साथ पीस डाले । इस उबटन को लगाने से
स्त्रियों की मुखश्री शरद् चन्द्र के समान उज्ज्वल और प्रदीप्त हो
जाती है ।
६—कूट, सरसों, तिल, दारुहलदी और हलदी, इनका उबटन
लगाने से शरीर की स्वर्ण के समान कान्ति बढ़ जाती है ।