रतिरहस्य: असली कोकशास्त्र (पण्डित कोक्कोक - कामकला, दाम्पत्य-जीवन एवं सम्पूर्ण रति-विज्ञान)
Rati Rahasya or Asli Koka Shastra of Kokkoka with Hindi Commentary
पण्डित कोक्कोक (भाषा टीकाकार: पण्डित कन्हैयालाल) द्वारा
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ज्ञता से भरे हुए होते हैं कि जो सभ्य स्त्री-पुरुष के मुँह से निकल
ही नहीं सकते। उन पर तो विचार नहीं, और जो पवित्र शिक्षापूर्ण
गाने पति के सामने गाये जायँ तो वह निर्लज्ज व्यवहार समझा
जाय। भला इससे बढ़कर भी कोई वज्र मूर्खता हो सकती है। इसी
अविवेक के कारण ही गृहस्थों की हालत बिगड़ी हुई है। गृहस्थों
को कभी गन्दे गीत स्वयं गाने वा सुनने नहीं चाहिएँ। इससे अपने
तन मन धन वा कुल परिवार सभी का विनाश होता है। अतः
सबको सुन्दर शिक्षाओं से भरे हुए ही गाने सुनने वा गाने चाहिए।
जिससे अपना और दूसरे सुनने वालों का उपकार हो।
स्त्री के सभी प्रकार के श्रृङ्गार तथा उपरोक्त कलाओं के प्रयोग
पति को प्रसन्न करने के लिए ही होते हैं। पतिव्रता स्त्रियें पति के
घर पर रहने पर उपरोक्त उपायों से काम लेती हैं। जब पति पर-
देश चला जाता है तब साधारण रूप से रहती हैं, जिसमें विनोद
का कोई चिन्ह दिखायी नहीं देता।
मनुष्य जब बाहर से घर आता है तब वह काम-काज से थका
हुआ विक्षुब्ध-मन आराम चाहने वाला होता है घर आने पर जब
उसे आराम नहीं मिलता प्रत्युत कलह, गहने आदि के तकादे और
रूक्ष वचन सुनने को मिलते हैं तो वह इनसे छुटकारा पाने के लिए
घर से बाहर निकल जाता है और दिल बहलाने के लिए मित्र-
मण्डली में जा पहुँचता है। मित्र-मण्डली के लोग भी वैसे ही जले
दिल होते हैं वे भी कोई मनोविनोद की वस्तु चाहते हैं। जब