रतिरहस्य: असली कोकशास्त्र (पण्डित कोक्कोक - कामकला, दाम्पत्य-जीवन एवं सम्पूर्ण रति-विज्ञान)
Rati Rahasya or Asli Koka Shastra of Kokkoka with Hindi Commentary
पण्डित कोक्कोक (भाषा टीकाकार: पण्डित कन्हैयालाल) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंअसली कोकशास्त्र ४१५
पुष्पवेणि-बन्धन
बेला, चमेली, जूही आदि कलियों की माला बनाकर उससे
सिर के बालों को गूँथना। किन्तु ध्यान रहे कलियें मुरझाते ही
मालायें उतार डालनी चाहिएँ, नहीं तो दुर्गन्ध हो जाने से लाभ
के स्थान में हानि हीं पैदा हो जायगी।
केशरंजन
सिर को धोकर कंघी से साफ करना और सुगन्धित तेल
लगाना। सिर में तेल वही लगाना चाहिए जो फूलों से बसाया
हुआ हो। जो सेंटेड अर्थात् विलायती सेन्ट से मिलाकर बनाया
जाता है, वह कभी न लगाना चाहिए। क्योंकि उसके लगाने से
बाल बहुत जल्दी सफेद हो जाते हैं। आजकल लोग गरी का तेल
लेकर उसमें सेन्ट मिला लेते हैं जो बहुत किफायत पड़ता है किन्तु
यह उनकी भारी भूल है। गरी का तेल हमेशा बिना खुशबू का
सादा ही व्यवहार करना चाहिए। क्योंकि बाजार में भी वह सेन्ट
मिलाकर ही बेचा जाता है उसमें फूल नहीं बसाये जाते और न
उसमें फूल बस सकते हैं।
अलङ्कार
कान, नाक, गले और हाथों में पहनने के गहने सोने के और
पाँव तथा कमर में चाँदी के हलके नक्कासीदार होने चाहिएँ। हाथ
में चूड़ी, कान में कर्णफूल, गले में सिकड़ी, नाक में लौंग, पाँव में
बिछुआ पायजेब और कमर में करधनी होनी चाहिए। हाथ की