रतिरहस्य: असली कोकशास्त्र (पण्डित कोक्कोक - कामकला, दाम्पत्य-जीवन एवं सम्पूर्ण रति-विज्ञान)
Rati Rahasya or Asli Koka Shastra of Kokkoka with Hindi Commentary
पण्डित कोक्कोक (भाषा टीकाकार: पण्डित कन्हैयालाल) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें४१४ असली कोकशास्त्र
केश विन्यास
सिर के बालों की अनेक विध रचना जिससे सौन्दर्य की विशेष
झलक आ जाय । उनमें सोने के कांटे और आभूषणादि भी सजाये
जाते हैं ।
नेत्र-रञ्जन
नेत्रों में अंजन आदि लगाना । जो नेत्रों के रोग नाश करने
वाला भी हो ।
करपदोपराग
हाथ और पाँव में मेंहदी से नाना प्रकार रचना करना । अथवा
आलता से रंगना । मेंहदी से हाथ पाँव की जलन भी नष्ट होती
है, जो स्त्रियों के लिए बहुत हितकर है ।
दशन-राग
दाँतों को खूब मोती के समान चमकदार बनाना । जिनमें
किसी प्रकार का मैल न रहे ।
मुख-विलास
जिह्वा को अच्छी प्रकार साफ कर मुख में इलायचो पान आदि
सुगन्धित वस्तु रखना । जो स्वास्थ्य के लिए भी हितकर हो ।
मस्तकाभ
माथे में सिन्धूर या ईङ्गुर आदि का विन्दु लगाना, और मुख
पर सौन्दर्यवर्द्धक वस्तु का प्रयोग करना । किन्तु ध्यान रहे वह
किसी प्रकार का रक्त विकार न उत्पन्न करती हो ।