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सर्वकोश
रतिरहस्य: असली कोकशास्त्र (पण्डित कोक्कोक - कामकला, दाम्पत्य-जीवन एवं सम्पूर्ण रति-विज्ञान)

रतिरहस्य: असली कोकशास्त्र (पण्डित कोक्कोक - कामकला, दाम्पत्य-जीवन एवं सम्पूर्ण रति-विज्ञान)

Rati Rahasya or Asli Koka Shastra of Kokkoka with Hindi Commentary

पण्डित कोक्कोक (भाषा टीकाकार: पण्डित कन्हैयालाल) द्वारा

DevanagariHindipublished440 पृष्ठ

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४१६ असली कोकशास्त्र
अँगुली में नगदार अँगूठी । उपरोक्त आभूषणों में जैसा नग
शोभता हो वैसा लगाना चाहिए ।
वसन
पहनने के वस्त्र ठीक नाप के सिले और खुशनुमा मनचाहे रंग
में रंगे हों। ओढ़ने के भी हल्के साफ सुथरे रंगे होने चाहिएँ ।
वस्त्रों पर बेल बूटें, किनारीदार झालर यथायोग्य बने हों ।
सूत्रक्रीड़ा
वस्त्रों पर बेल-बूटे काढ़ना । वस्त्रों के किनारे फीता या झालर
आदि बनाना ।
सूचिकला
पहनने आदि के वस्त्रों को सीना, काटना, ब्योंतना आदि भली
प्रकार करना ।
सूत्रकला
चर्खे वा किसी अन्य प्रकार से सूत कातना ।
गायनकला
स्वर, राग रागिणी, समय, ताल, ग्राम, तान, गीत आदि का
ज्ञान होना चाहिए ।
वादित्र
तान पूरा स्वरगज ( सराज ) सितार, सारंगी, हारमोनियम
तबला, पखावज, मृदंग आदि वादित्रों का बजाना जानने योग्य है ।
माल्यनिर्माण
हर प्रकार के फूलों की हर तरह की माला बनाना ।