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सर्वकोश
रतिरहस्य: असली कोकशास्त्र (पण्डित कोक्कोक - कामकला, दाम्पत्य-जीवन एवं सम्पूर्ण रति-विज्ञान)

रतिरहस्य: असली कोकशास्त्र (पण्डित कोक्कोक - कामकला, दाम्पत्य-जीवन एवं सम्पूर्ण रति-विज्ञान)

Rati Rahasya or Asli Koka Shastra of Kokkoka with Hindi Commentary

पण्डित कोक्कोक (भाषा टीकाकार: पण्डित कन्हैयालाल) द्वारा

DevanagariHindipublished440 पृष्ठ

पृष्ठ 425, कुल 440 में से

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असली कोकशास्त्र ४१३
करने वालों को उन पशुओं की हत्या का भागी बनना पड़ेगा।
अतएव चर्बी का साबुन सब तरह से वर्जित है।
शृङ्गार
स्त्री को चाहिए प्रातःकाल स्नान कर लेने के बाद शृङ्गार करे।
शृंगार में विशेष आभूषण पहनने की आवश्यकता नहीं, सामान्य
आभूषण ही पर्याप्त हैं। विशेष आभूषण गृहस्थी काम करने में
रुकावट डालते हैं और गिरने-पड़ने टूटने का भी भय रहता है।
शृंगार क्या है ? शरीर की सजावट। वह भी दो प्रकार की
होती है। एक असली और दूसरी नकली। असली वह है जो
शरीर की स्वाभाविक रूप-लावण्य और सुन्दरता में अर्थात्—सदा-
चार, संयम तथा ब्रह्मचर्य से प्राप्त होती है। उस पर स्वच्छ
सामान्य वस्त्र तथा केशविन्यास (बालों का सँवारना) ही सोने में
सुगन्ध का काम करता है। किन्तु जहाँ स्वाभाविक सुन्दरता नहीं
वहाँ नकली की आवश्यकता पड़ती है। इसी लिए चौंसठ कलाओं
का विधान किया गया है। जो सांसारिक कार्यों में बड़ी सहायक
होती हैं और जिनसे स्त्री पुरुष को प्रसन्न करने के लिए उन साधनों
से काम ले सके। उनमें से क्रियोपयोगी कुछ कलाएँ नीचे दी
जाती हैं।