रतिरहस्य: असली कोकशास्त्र (पण्डित कोक्कोक - कामकला, दाम्पत्य-जीवन एवं सम्पूर्ण रति-विज्ञान)
Rati Rahasya or Asli Koka Shastra of Kokkoka with Hindi Commentary
पण्डित कोक्कोक (भाषा टीकाकार: पण्डित कन्हैयालाल) द्वारा
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आ चढ़ती है जिससे शिर-दर्द बुद्धि-मान्द्य आदि शिरोरोग हो जाते
हैं। यदि किसी नदी में स्नान करना हो तो वहाँ भी किनारे पर
पहले सिर धोकर क्रमशः सब अंगों को भिगोवे, तब नदी में उतर
जाय फिर कोई हानि नहीं होगी। उसके बाद मोटा गमछा या
तौलिया को भिगोकर शरीर के सब अवयवों पर मलने से मैल
अच्छा साफ होता है। यह ध्यान रखना चाहिए कि बाल न टूटने
पाये। स्नान के बाद गमछा निचोड़ कर शरीर पोंछ डालना
चाहिए। जिससे कहीं पानी न रहने पाये, अन्यथा पानी रहने पर
दाद होने का डर रहता है। इस प्रकार स्नान करने से शरीर के
रोमकूपों के छिद्र खुल जाते हैं। जिससे पसीना अच्छी तरह अन्दर
से बाहर निकल सकता है जो शरीर को सुन्दर और रोगहर बनाता है।
महीने में दो-चार बार अच्छे साबुन से स्नान कर लेना चाहिए।
अच्छे साबुन के माने जो शरीर की त्वचा को फाड़ न दे और न
इतना रूखा ही हो कि शरीर पर सिमटन पड़ जायँ। चरबी का
साबुन कभी न लगाना चाहिए, क्योंकि वह शरीर के छिद्रों को
खोलता नहीं प्रत्युत् उन्हें और बन्द कर देता है। जिससे पसीने का
आना बन्द हो जाता या बहुत ही कम हो जाता है। लगाने वाले
समझते हैं कि साबुन बहुत अच्छा है। यथार्थ में वह बहुत ही
नुकसान देने वाला है। ऐसी राय डाक्टरों की हैं। और दूसरा अप-
वित्र भी है, बिना जानवरों के मारे चर्बी नहीं मिलती। चर्बी के
लिए जानवर मारे जाते हैं। इस लिए चर्बी का साबुन व्यवहार