रतिरहस्य: असली कोकशास्त्र (पण्डित कोक्कोक - कामकला, दाम्पत्य-जीवन एवं सम्पूर्ण रति-विज्ञान)
Rati Rahasya or Asli Koka Shastra of Kokkoka with Hindi Commentary
पण्डित कोक्कोक (भाषा टीकाकार: पण्डित कन्हैयालाल) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें४१० असली कोकशास्त्र
सोने में सुगन्ध का काम हो जाय। अर्थात् सफेद सेंधा नमक खूब
बारीक पीसकर शुद्ध सरसों के थोड़े तेल में मिला लें और दतौन
की कूची के साथ अथवा अँगुली द्वारा दाँतों तथा मसूड़ों पर रगड़े।
इससे मसूड़ों का कोई रोग नहीं होता और सफाई बहुत जल्दी
होती है। नमक विष-हर है। जिनके मसूड़ों से खून जाता हो वे
अवश्य इस मंजन का प्रयोग करें उन्हें तत्काल इसका लाभ मालूम
होगा और कुछ दिन प्रयोग करने पर यह रोग सदैव के लिए
चला जायगा।
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नेत्र स्नान
दन्तधावन करने के बाद मुँह में पानी भरकर, एक लोटे में
पानी ले और दूसरे हाथ की अँजली भर कर आँख खोल उसमें छींटे
दे, एक लोटा पानी खतम हो जाने पर मुँह का पानी निकाल दे
और फिर उसी प्रकार दुबारा मुख में पानी भर कर आँखों में छींटे
दे। इस प्रकार कम से कम दस सेर पानी काम में लाना चाहिए।
इसका फल यह होगा कि नेत्रों की ज्योति बढ़ेगी और गयी हुई
रोशनी भी फिर से लौट आयेगी। मस्तक की स्मरण-शक्ति बढ़ेगी,
सिर दर्द आदि सिर के सभी प्रकार के रोग नष्ट होंगे। सिर के
काले बाल असमय में सफेद न होने पायेंगे। यदि सफेद हो गये
हों तो इसके कुछ वर्ष लगातार प्रयोग से फिर काले हो जायेंगे।