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सर्वकोश
रतिरहस्य: असली कोकशास्त्र (पण्डित कोक्कोक - कामकला, दाम्पत्य-जीवन एवं सम्पूर्ण रति-विज्ञान)

रतिरहस्य: असली कोकशास्त्र (पण्डित कोक्कोक - कामकला, दाम्पत्य-जीवन एवं सम्पूर्ण रति-विज्ञान)

Rati Rahasya or Asli Koka Shastra of Kokkoka with Hindi Commentary

पण्डित कोक्कोक (भाषा टीकाकार: पण्डित कन्हैयालाल) द्वारा

DevanagariHindipublished440 पृष्ठ

पृष्ठ 421, कुल 440 में से

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असली कोकशास्त्र ४०६
नासारन्ध्र के समीप अमृत-कूप है, उसमें जो जल, तत्व का दन्त-
श्रेणी के संघर्ष से मधुरामृतमय भाग तैयार होता है वह जाकर
ठहरता है। जिससे वह कूप सदैव भरा रहता है। योगी लोग जब
जबान को लौट कर उस अमृत-कूप के पास ले जाते हैं तब उन्हें
अमृत-कूप से गिरी हुई मधुर अमृतमयी बूँद के स्वाद का आनन्द
मिलता है।
जो लोग वैसा अभ्यास करते हैं उन लोगों को भी उपरोक्त
आनन्द का अनुभव होता है। हम लोगों के पेट में वह बराबर बूँद
बूँद होकर टपकता रहता है जो खाये हुए पदार्थ के लिए अमृत
होता है। यदि दाँतों की सफाई नहीं रक्खी जायगी तो वही अमृत,
विष हो जायगा। क्योंकि दाँतों में सड़े हुए बदबूदार मैल से लग-
कर लार में विष उत्पन्न हो जाता है और वह अमृतकूप को विष-
कूप बनाती हुई पेट में पहुँच कर कीड़े, अजीर्णता आदि अनेक रोग
पैदा कर देती है। इस लिए स्वास्थ्य चाहने वाले मनुष्यों को हमेशा
दाँत साफ रखने चाहिएँ । ताजी दतौने का रस मसूड़ों को पुष्ट
करता है।
पेट की कब्ज जबान से देख ली जाती है। जब पेट में अनुचित
मल का भाग होता है, तब जबान पर मैल जम जाता है। पेट के साफ
रहने पर नहीं रहती। इसी लिए वैद्य लोग जबान देखते हैं। दाँत और
जबान साफ रखने वाले का कभी पेट गन्दा नहीं रह सकता ।
दतौन के साथ यदि दन्त-मञ्जन भी प्रयोग कर लिया करें तो