रतिरहस्य: असली कोकशास्त्र (पण्डित कोक्कोक - कामकला, दाम्पत्य-जीवन एवं सम्पूर्ण रति-विज्ञान)
Rati Rahasya or Asli Koka Shastra of Kokkoka with Hindi Commentary
पण्डित कोक्कोक (भाषा टीकाकार: पण्डित कन्हैयालाल) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंअसली कोकशास्त्र ४०५
शिर की कोई भी इन्द्रिय इसे स्वीकार नहीं करती बल्कि प्रत्यक्ष
रो रो कर आँसू बहाती हैं और इस बात का संकेत करती हैं कि
अय मनुष्य ! इस बला को जबरदस्ती न ठूँस, नहीं तो आखिर को
तुम्हे हमसे हाथ धोना पड़ेगा ।
शौच
प्रातःकाल रात्रि के चौथे प्रहर में अर्थात् चार बजे उठकर
सबसे पहिले बिस्तर पर बैठकर पाँच मिनट तक ईश्वर का ध्यान
और फिर कुल्ला कर बासी मुँह डेढ़ पाव या आधसेर पानी पीकर
टहले इससे पाखाना अच्छी तरह साफ आवेगा और कब्ज नहीं
होगी । पहिले-पहल सर्दी हो जाने का डर है । किन्तु उसकी परवाह
न करनी चाहिए, वह स्वयं अच्छी हो जायगी । शौच होकर
आवदस्त ले लेने पर मूत्रेन्द्रिय की खाल हटाकर ठण्डे पानी से
अच्छी तरह धो डालना चाहिए । इसके बाद दतौन, स्नान आदि
करना चाहिए । तत्पश्चात् सन्ध्या सूर्य उदय से पूर्व तारों की छाया
में समाप्त कर देनी चाहिए इतने काम सूर्य उदय के पूर्व अवश्य
हो जाने चाहिएँ ।