रतिरहस्य: असली कोकशास्त्र (पण्डित कोक्कोक - कामकला, दाम्पत्य-जीवन एवं सम्पूर्ण रति-विज्ञान)
Rati Rahasya or Asli Koka Shastra of Kokkoka with Hindi Commentary
पण्डित कोक्कोक (भाषा टीकाकार: पण्डित कन्हैयालाल) द्वारा
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कारण विषाक्त होकर हृत्कंपन को रोक देता है। इस लिए यदि
जीवन चाहते हों और वह भी स्वास्थ्यप्रद, तो आज से ही इन
नशीले प्राणघातकी द्रव्यों का सेवन छोड़ दें, उसी में सब का
कल्याण है।
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नकछिकनी
दूसरी है नकछिकनी जिसे लोग सुँघनी कहते हैं। यह पिसी
हुई तमाखू होती है। यह इतनी बारीक होती है कि नाक के पास
आते ही स्वास के साथ दिमाग में चढ़ जाती है, जिससे छींक पर
छींक आने लगती है और आँख नाक से पानी निकलने लगता है।
कई मनुष्यों को इसका इतना अभ्यास बढ़ जाता है कि वे प्रतिक्षण
नासदानी हाथ में लिए रहते हैं और उनकी नाक के नथुने बराबर
भरे रहते हैं। यह वह हालत हुई कि “गये थे नमाज पढ़ने और
रोजे गले लग गये” लगे थे सर्दी दूर करने और दूसरा रोग पीछे
लग गया। नांस लेने वाले के हाथ हमेशा गन्दे रहते हैं और सुर्र-
सुर्र हमेशा नाक बहा करती है। नास वाले को शिर के सभी रोग
हो जाते हैं। नेत्रों से जल गिरता रहता है स्मरणशक्ति घट जाती
है। इसको सुँघनी न कहकर नकछिकनी ही कहना उचित है क्यों
कि-“यथा नाम तथा गुणः” जैसा नाम वैसे ही गुण भी है।
इस वस्तु को भी विचारवान पुरुषों को छोड़ देना चाहिए क्योंकि