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सर्वकोश
रतिरहस्य: असली कोकशास्त्र (पण्डित कोक्कोक - कामकला, दाम्पत्य-जीवन एवं सम्पूर्ण रति-विज्ञान)

रतिरहस्य: असली कोकशास्त्र (पण्डित कोक्कोक - कामकला, दाम्पत्य-जीवन एवं सम्पूर्ण रति-विज्ञान)

Rati Rahasya or Asli Koka Shastra of Kokkoka with Hindi Commentary

पण्डित कोक्कोक (भाषा टीकाकार: पण्डित कन्हैयालाल) द्वारा

DevanagariHindipublished440 पृष्ठ

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पृष्ठ 415

असली कोकशास्त्र ४०३
त्याग अवश्य कर दें।
इन तीन वस्तुओं के बदले नीचे लिखे ढंग से निर्दोष ओर पुष्टि-
कर चाय बन सकती है। इसे चाय के नाम पर मजे में पी सकते
हैं। काफी ओर निर्दोष चाय के स्वाद में इतना कम अन्तर है कि
उसे काफी पीने वाले भी नहीं समझ सकते। पहले गेहूँ को साफ
तवे या कड़ाही में या चूल्हे पर भूनना चाहिए। खूब लाल होकर
कलछाने लगने पर उतार लिए जायँ ओर दाल दलने की छोटी
चक्की में साधारण तौर पर बारीक दल लिए जायँ। इसमें से एक
चम्मच भर कर पियाले में डालकर उस पर उबलता हुआ पानी
डाल दें। यदि इसे एक मिनट तक चूल्हे पर चढ़ा रहने दें तो
भी अच्छा हो। आवश्यकता जान पड़े तो दूध और शक्कर भी इसमें
मिला ली जाय। दूध और शक्कर के बिना भी इसे पी सकते हैं।
पाठक इसका प्रयोग करके देख सकते हैं। इसे ग्रहण कर जो लोग
चाय, काफी और कोको छोड़ देंगे उनके पैसे बचेंगे और स्वास्थ्य-
रक्षा भी होगी।
जिन पाश्चात्य देशों में इन नशीले द्रव्यों का सेवन अधिक
रूप से होता था उन्हीं में हार्टफेल का रोग होता था। अब जब
से भारतवर्ष में नशों का आधिक्य हुआ है तब से यहाँ पर भी हृत्कंपना-
वरोध (हार्टफेल) का रोग फैल गया है। चलता-फिरता मनुष्य
मार्ग में ही लेट जाता है और किसी से कुछ नहीं कह पाता। यह
भयंकर रोग फेफड़ों की कमजोरी से, रक्त साफ न होने के