रतिरहस्य: असली कोकशास्त्र (पण्डित कोक्कोक - कामकला, दाम्पत्य-जीवन एवं सम्पूर्ण रति-विज्ञान)
Rati Rahasya or Asli Koka Shastra of Kokkoka with Hindi Commentary
पण्डित कोक्कोक (भाषा टीकाकार: पण्डित कन्हैयालाल) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें४०२ असली कोकशास्त्र
आरोग्य को कितनो हानि पहुँचती है। काफी के सम्बन्ध में एक
दोहा प्रचलित है:—
“कफ छांटे, बादी हरे, करे धातु बल छीन ।
रक्तहिं पानी सम करे, दो गुन अवगुन तीन ॥”
यह दोहा बिल्कुल ठीक मालूम होता है। निःसन्देह काफी में
कफ और बादी हरने की शक्ति है। पर अन्य चीजों में भी यह
शक्ति मौजूद है। इन कारणों से काफी पीने वाले अदरख का रस
पीयें तो काफी की आवश्यकता पूरी हो जायगी। याद रहे कि धातु
जैसी अमूल्य चीज को जिस वस्तु से हानि पहुँचे, जिससे बल का
क्षय हो, जो रक्त को पानी कर दे, उसे त्यागने ही में कल्याण है।
कोको में भी ये सब दोष हैं। चाय के समान इसमें वह तत्त्व
मौजूद है जो चमड़े को बिल्कुल संज्ञाशून्य बना देता है।
जो लोग आरोग्य में नीति का समावेश करते हैं उनके सामने
इन तीनों वस्तुओं के सम्बन्ध में नीचे लिखी दलीलें पेश की जा
सकती हैं। चाय काफी और कोको अधिकांशतः उन मजदूरों के द्वारा
उत्पन्न की जाती है जो शर्त्तबँधे कुली बनकर चाय के बगीचों में जाते
हैं। जहाँ कोको की उपज होती है वहाँ मजदूरों पर होते हुए जुल्मों
को यदि अपनी आँखों से देख लें तो उसके ग्रहण की जरा भी
इच्छा न करें। कोको के खेतों में होने वाले जुल्मों पर बड़ी-बड़ी
पुस्तकें लिखी जा चुकी हैं। यदि हम सब अपनी खुराक की उत्पत्ति
के विषय में पूरा ज्ञान प्राप्त करें तो १०० में से ९० वस्तुओं का