रतिरहस्य: असली कोकशास्त्र (पण्डित कोक्कोक - कामकला, दाम्पत्य-जीवन एवं सम्पूर्ण रति-विज्ञान)
Rati Rahasya or Asli Koka Shastra of Kokkoka with Hindi Commentary
पण्डित कोक्कोक (भाषा टीकाकार: पण्डित कन्हैयालाल) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें४०० असली कोकशास्त्र
करते हैं। इनसे हमारे आचरण का नाश होता और हम व्यसनों
के गुलाम बन जाते हैं।
लोगों के मन में यह बैठाना बहुत कठिन जान पड़ता है कि
चाय, काफी और कोको बुरी चीजें हैं। पर, चाहे जो हो कहना
ही पड़ता है कि ये सब चीज बुरी है। इनमें एक विशेष प्रकार का
नशा होता है। यदि चाय और काफी के साथ दूध शक्कर न हो तो
इनमें एक भी पुष्टिकारक पदार्थ नहीं। केवल चाय और काफी पर
जीवन निर्वाह करके कितने ही प्रयोग किये गये। सिद्ध यही हुआ
कि इनमें खून बढ़ाने वाली चीजें बिलकुल नहीं हैं। हम लोग कुछ
वर्ष पहले साधारण तौर पर चाय और काफी नहीं पीते थे, कहीं
किसी विशेष अवसर पर या दवा में इन्हें पी लेते थे, परन्तु अब
नई रोशनी के कारण चाय और काफी साधारण वस्तु बन गई है।
अब तो हम केवल मिलने आने वाले मेहमानों तक को ये चीजें
पिलाते हैं। चाय की पार्टियाँ देते हैं। लार्ड कर्जन के शासनकाल
से तो चाय ने और भी हाथ-पैर फैला दिये हैं। इन साहब बहादुर
ने चाय के व्यापारियों को उत्तेजना दे देकर चाय का प्रचार घर-
घर करा दिया और लोग जहाँ पहले आरोग्यकारक चीजें पीते थे
वहाँ अब रोगकारी चाय पीने लग गये हैं।
कोको बहुत नहीं फैला, क्योंकि वह चाय से कुछ महँगा है।
सौभाग्य से हम लोगों को इसका परिचय बहुत कम है, फिर भी
फैसनेबुल घरों में उसकी पूर्ण सत्ता है।