रतिरहस्य: असली कोकशास्त्र (पण्डित कोक्कोक - कामकला, दाम्पत्य-जीवन एवं सम्पूर्ण रति-विज्ञान)
Rati Rahasya or Asli Koka Shastra of Kokkoka with Hindi Commentary
पण्डित कोक्कोक (भाषा टीकाकार: पण्डित कन्हैयालाल) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंअसली कोकशास्त्र १६६
सिगरेट पर स्वर्गीय टालस्टाय ने लिखा है कि एक मनुष्य के
मन में अपनी स्त्री के खून करने का विचार आया। छुरा निकाल,
चलाने को तैयार हुआ, पछताया और पीछे हट गया। फिर सिगरेट
पीने बैठा, सिगरेट के जहर से अक्ल पर पर्दा पड़ गया; तब
उसने खून किया। मि० टालस्टाय तम्बाकू को एक सूक्ष्म प्रकार का
और कई अंशों में शराब से भी खराब नशा मानते थे।
सिगरेट का खर्च भी कुछ कम नहीं। कुछ मनुष्यों को चुरुट
के पीछे हर महीने ५ पौंड अर्थात् ७५) रुपये तक खर्च करते मैंने
अपनी आँखों देखा है।
सिगरेट से पाचनशक्ति कम हो जाती है। भोजन का स्वाद
नहीं मिलता। अन्न फीका मालूम होता है, इस लिए उसमें मसाला
इत्यादि डालना पड़ता है। सिगरेट पीने वाले की साँस से बदबू
निकलने लगती है। उसका धुआँ हवा को बिगाड़ता है। कितनी
ही बार मुँह में फफोले पड़ आते हैं। मसूड़े और दाँत काले या
पीले पड़ जाते हैं इससे कितनी ही लोगों को बड़ी ही भयंकर
बीमारियाँ हो जाती हैं। समझ में नहीं आता कि शराब के निन्दक
सिगरेट क्यों पीते हैं ? सिगरेट का जहर सूक्ष्म है, शायद इसीसे
उसका प्रयोग करते हैं। जो निरोग रहना चाहते हैं उन्हें सिगरेट
पीना जरूर छोड़ देना चाहिए।
शराब, तम्बाकू, बीड़ी और भाँग इत्यादि व्यसन हमारे शरीर
का आरोग्य हर लेते हैं; मन और धन के आरोग्य का भी हरण