रतिरहस्य: असली कोकशास्त्र (पण्डित कोक्कोक - कामकला, दाम्पत्य-जीवन एवं सम्पूर्ण रति-विज्ञान)
Rati Rahasya or Asli Koka Shastra of Kokkoka with Hindi Commentary
पण्डित कोक्कोक (भाषा टीकाकार: पण्डित कन्हैयालाल) द्वारा
पृष्ठ 410, कुल 440 में से
संदर्भ में पढ़ें३६८ असली कोकशास्त्र
अनेक प्रकार के सुगन्धित तेजाब छिड़कते हैं और अफीम का पानी
मिलाते हैं। इससे सिगरेट हम पर अधिकाधिक अधिकार जमाती
जाती है। उसके लिए नोटिसबाजों में हजारों पौंड खर्च किये जाते
हैं। यूरोप में सिगरेट कम्पनियाँ अपने छापेखाने चलातीं, वायस-
कोप खरीदतीं, अनेक प्रकार की इनाम बाँटतीं, लाटरियाँ निकालती
और नोटिसबाजी में पानी की तरह पैसा बहाती है। फल यह हुआ
कि स्त्रियों तक को सिगरेट की आदत लग गई है। सिगरेट पीने पर
कविताएँ भी बनायी गई है, इनमें सिगरेट को “गरीब, नेवाज”
( दीनबन्धु ) की उपमा दी गई है।
सिगरेट तम्बाकू से होने वाली हानियों की गिनती नहीं हो
सकती। सिगरेट पीने वाले मनुष्य का व्यसन इतना अधिक बढ़
जाता है कि वह बिना किसी का परवा किये दूसरे के घर में बिना
इजाजत ही सिगरेट का धुआँ उड़ाने लगता है, किसी की शरम
नहीं रखता।
देखा गया है कि सिगरेट और तम्बाकू पीने वाला मनुष्य