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सर्वकोश
रतिरहस्य: असली कोकशास्त्र (पण्डित कोक्कोक - कामकला, दाम्पत्य-जीवन एवं सम्पूर्ण रति-विज्ञान)

रतिरहस्य: असली कोकशास्त्र (पण्डित कोक्कोक - कामकला, दाम्पत्य-जीवन एवं सम्पूर्ण रति-विज्ञान)

Rati Rahasya or Asli Koka Shastra of Kokkoka with Hindi Commentary

पण्डित कोक्कोक (भाषा टीकाकार: पण्डित कन्हैयालाल) द्वारा

DevanagariHindipublished440 पृष्ठ

पृष्ठ 406, कुल 440 में से

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३६४ असली कोकशास्त्र
जल
जल हमारे बहुत काम में आता है। इसके बिना हमारा एक
भी काम नहीं चलता, आटा सानने दाल, भात, तरकारी आदि
सभी खाद्य वस्तुओं के बनाने तथा पीने के काम में आता है। हमारे
शरीर तथा भोजन में सत्तर फीसदी जल का अंश माना गया है।
इस लिए जल के दूषित होने से भी हमारा स्वास्थ्य बहुत शीघ्र
खराब हो सकता है। हलका जल मधुर तथा स्वादिष्ट है और
वह हमारे लिए स्वास्थ्यप्रद् भी है। भारी पानी नहीं। वह पीने में
खारी होता है। उसे यदि पीना पड़े तो औटाकर पीना चाहिए, तब
कोई हानि नहीं पहुँचायगा। जल हमेशा मोटे कपड़े से छानकर
पीना चाहिए। मनुष्य को प्रतिदिन दिनभर में अन्न से अठगुना
जल पीना चाहिए। ऋतु अनुसार कमोवेश भी किया जा सकता है।
जब नगर में रोग फैल जाता है अथवा फैलने की सम्भावना
होती है तब प्रायः बराबर देखने में आता है कि म्युनिसिपैलिटी की
ओर से नगर के सभी कुओं में लाल बुकनी डाली जाती है। इसका
प्रयोजन केवल रोगकारक कीटाणु मारकर जल साफ करना होता
है। अनेक स्थानों पर बिना बुझा चूना भी डालते हैं, उससे भी
यही लाभ होता है।
—०—