रतिरहस्य: असली कोकशास्त्र (पण्डित कोक्कोक - कामकला, दाम्पत्य-जीवन एवं सम्पूर्ण रति-विज्ञान)
Rati Rahasya or Asli Koka Shastra of Kokkoka with Hindi Commentary
पण्डित कोक्कोक (भाषा टीकाकार: पण्डित कन्हैयालाल) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंअसली कोकशास्त्र ३६३
प्राणायाम का फल
वायु में बड़ी शक्ति है। जब वह मोटर के टायर में भर दी
जाती है तब वह कितने वजन को कितनी आसानी से हवा की तरह
उड़ा ले जाती है, यह बात किसी से छिपी नहीं। प्रो० राममूर्त्ति
इसी के बल पर अस्सी मन का पत्थर छाती पर रखते थे और हाथी
को पीठ पर चढ़ाते थे। वायु का शरीर में संग्रह प्राणायाम से ही
होता है। प्राणायाम कहते हैं, प्राण के आयाम अर्थात् प्राण की
लम्बाई को। प्राण के लम्बा बढ़ा लेने से योगियों की आयु बढ़
जाती है। इस लिए जो भी प्राणायाम करेगा वह अवश्य स्वस्थ
ताक़तवर होगा और उसकी जीवन-शक्ति बढ़ेगी।
प्राणायाम में तोन क्रियायें करनी पड़ती हैं। पहली क्रिया पूरक
अर्थात् प्राणवायु को अत्यन्त धीरे-धीरे नासिका द्वारा अन्दर
खींचने का नाम पूरक है। दूसरी क्रिया कुम्भक अर्थात् भीतर
खींची हुई वायु को, खींचने के दुगुने तिगुने काल तक अन्दर रोक
रखने का नाम कुम्भक है। तीसरी क्रिया रेचक अर्थात् भीतर ली
हुई वायु को अत्यन्त धीरे-धीरे बाहर निकालने का नाम रेचक है।
पहली ओर तोसरी क्रिया करने में वायु के जाने का शब्द अपने को
भी सुनायी नहीं देना चाहिए।
धीरे-धीरे प्राणायाम का काल बढ़ाना चाहिए, एक साथ
बढ़ाने से लाभ के स्थान में हानि होने की सम्भावना है।