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सर्वकोश
रतिरहस्य: असली कोकशास्त्र (पण्डित कोक्कोक - कामकला, दाम्पत्य-जीवन एवं सम्पूर्ण रति-विज्ञान)

रतिरहस्य: असली कोकशास्त्र (पण्डित कोक्कोक - कामकला, दाम्पत्य-जीवन एवं सम्पूर्ण रति-विज्ञान)

Rati Rahasya or Asli Koka Shastra of Kokkoka with Hindi Commentary

पण्डित कोक्कोक (भाषा टीकाकार: पण्डित कन्हैयालाल) द्वारा

DevanagariHindipublished440 पृष्ठ

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असली कोकशास्त्र ३६
उचित समझता हूँ कि प्राण-तत्व और रासायनिक पृथक्करण के
तरीक़ों में कोई प्राकृतिक सम्बन्ध नहीं है । रसायन-शास्त्र केवल
इतना ही बतलाता है कि पृथक्करण के बाद शेष क्या रहा ।
सूक्ष्म-दर्शक यंत्र से मालूम होता है कि पुरुष-वीर्य के ये सूक्ष्म
जन्तु ही स्त्री-कोष को गर्भ-रूप में परिणत करने वाले हैं। इन
जन्तुओं को नीचे लिखे नामों से पुकारा जाता है—
१—स्परमेटोजा
२—सेमिनल फिलेमेण्ट
३—जूसपर्मस
४—सेमिनल एनेमल्क्यूल्स
५—स्परमेटोजोएड्स
इसके अतिरिक्त वैनर आदि विद्वानों ने पुरुष-वीर्य में सेमिनल
ग्रेन्यूल्स नाम के दाने भी मालूम किये हैं जो कि सेमिनल फिलेमेण्ट
( वीर्य कीटों ) की अपेक्षा बहुत कम होते हैं। शुद्ध-वीर्य, वीर्य-कीट
और वीर्य के दानों से बना हुआ होता है । कलिकर के मतानुसार
पुरुष-वीर्य का प्रत्येक जन्तु १/६०० इंच का होता है । इन
जन्तुओं का अगला भाग चिपटा और गोला होता है; पिछला भाग
लम्बा और पतला होता है । सिर की लम्बाई १/१०००० इंच और
चौड़ाई भी उतनी ही होती है । इनके सिर की जड़ में एक बहुत
ही नाजुक और बारीक तार भी होता है, जो इसके आकार से