रतिरहस्य: असली कोकशास्त्र (पण्डित कोक्कोक - कामकला, दाम्पत्य-जीवन एवं सम्पूर्ण रति-विज्ञान)
Rati Rahasya or Asli Koka Shastra of Kokkoka with Hindi Commentary
पण्डित कोक्कोक (भाषा टीकाकार: पण्डित कन्हैयालाल) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें४० असली कोकशास्त्र
तिगुना-चौगुना लम्बा होता है। यह झिल्ली से ढँका हुआ होता
है। इस जन्तु का सिर भी इसी झिल्ली से ढँका रहता है। डॉक्टरों
ने इन जन्तुओं को सजीव माना है। जिस प्रकार मेंढक के नवजात
बच्चे पानी में इधर-उधर अपनी दुम को लहराते हुए तैरते हैं, ठीक
उसी प्रकार वीर्य्य-कीट भी वीर्य्य में विचरते हैं। इनकी गति सदा
आगे की ओर होती है। इन्हें वीर्य्य-कोष की गर्मी के समान काँच
की किसी गरम शीशी में डाल दिया जाय तो ये वहाँ २४ से ७२
घण्टे तक जीवित रह सकते हैं। इसी प्रकार की पिचकारी द्वारा
गर्भ धारण कराया जा सकता है। मृतक मनुष्य के शुक्राशय में
ये वीर्य्य-कीट कभी-कभी २४ घण्टे तक जीवित देखे गये हैं। जब
ये कीड़े मर जाते हैं, तब इनकी दुम सीधी हो जाती है।
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शुद्ध वीर्य की परख
स्फटिकाभ्यं द्रवं स्निग्धं मधुरं मधुगन्धि च ।
शुक्रमिच्छन्ति केचित्तु तैलक्षौद्रनिभं तथा ।
बिल्लोरी पत्थर के समान श्वेत रंग का, पतला, चिकना और
मधुर शहद की गन्ध वाला वीर्य शुद्ध होता है !
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