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सर्वकोश
रतिरहस्य: असली कोकशास्त्र (पण्डित कोक्कोक - कामकला, दाम्पत्य-जीवन एवं सम्पूर्ण रति-विज्ञान)

रतिरहस्य: असली कोकशास्त्र (पण्डित कोक्कोक - कामकला, दाम्पत्य-जीवन एवं सम्पूर्ण रति-विज्ञान)

Rati Rahasya or Asli Koka Shastra of Kokkoka with Hindi Commentary

पण्डित कोक्कोक (भाषा टीकाकार: पण्डित कन्हैयालाल) द्वारा

DevanagariHindipublished440 पृष्ठ

पृष्ठ 398, कुल 440 में से

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३८६ असली कोकशास्त्र
जीव दुग्धाहारी होते हैं। किन्तु फिर नहीं रहते। मनुष्य ही बुद्धि
बल से अपनी लाभदायक वस्तुओं का संग्रह कर लेता है यही इसमें
पशु आदि से विशेषता है। इसी लिए इसे मनुष्य कहते हैं।
फलाहार
यह सबसे उत्तम आहार है। क्योंकि प्रकृति इन्हें बनाती है।
जमीन से पानी खिंचकर स्वच्छ छना हुआ जिसमें किसी प्रकार
का विकार नहीं रहता वह फल में संचित होता है और सूर्य की
किरणों के ताप से पकता है। जिस वस्तु पर सूर्य का प्रकाश और
सूर्य की गरमी तथा चन्द्र की सुधावर्षिणी रश्मियों का संसर्ग हुआ
हो तथा जिसने वायु के पवित्र झोकों में कई महीने दिन रात अठ-
खेलियाँ की हों। वह अमृत रस भरा प्रकृति देवी का पैक किया हुआ
ताजा फल, जब हमें मिले तब भला उसकी बराबरी कौन कर
सकता है। सबसे अधिक स्वास्थ्यप्रद बल और तेज को देने वाला
है। बानर को देखो कितना छोटा होता है और बड़े से बड़े पेड़ को
हिला डालता है, छोटी-छोटी भुजाओं के बल कितना लम्बा कूदता
है। तथा कितनी फुरती रखता है। वह अधिक फलों का ही सेवन
करता है। अन्न की अपेक्षा इससे मल बहुत कम तैयार होता है।
अधिक से अधिक लाभ देने वाली वस्तु हमें फलों से मिलती है।
फलों से कन्द, मूल, शाकपात, आदि सभी का ग्रहण हो जाता है।
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