रतिरहस्य: असली कोकशास्त्र (पण्डित कोक्कोक - कामकला, दाम्पत्य-जीवन एवं सम्पूर्ण रति-विज्ञान)
Rati Rahasya or Asli Koka Shastra of Kokkoka with Hindi Commentary
पण्डित कोक्कोक (भाषा टीकाकार: पण्डित कन्हैयालाल) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें२५ असली कोकशास्त्र ३८५
रक्ताहार
रक्ताहारी वे जीव हैं जो केवल रक्तपान करके जीवन धारण
करते हैं। जैसे जूँ, खटमल आदि। इस प्रकार के जीव प्रायः
प्राणियों के शरीरों पर रहते हैं।
मांसाहार
मांसाहारी वे ही जीव हैं जो केवल अपना जीवन मांस से ही
यापन करते हैं। जैसे शेर, चीता आदि जो प्रायः जंगलों में रहते
हैं और जल में भी।
अन्नाहार
अन्न पर जिनका जीवन निर्भर है वे अन्नाहारी हैं। अर्थात्
मनुष्यादि अनेक जीव हैं।
दुग्धाहार
मनुष्य का दूसरा भोजन दुग्ध है। प्रायः अन्न के साथ इसे
दूध का आहार करना पड़ता है। क्योंकि इसके बिना रूक्ष भोजन
अधिक खाना पड़ता है। जो हानिप्रद होता है। दुध के बिना घी
भी नहीं मिल सकता जो परमावश्यक है। अस्तु-यह रहा मिलि-
ताहार। जब मनुष्य को योगाभ्यास की आवश्यकता पड़ती है तब
अन्न भारी और मलाबद्ध होता है—उस समय दूध ही उत्तम आहार
होता है जो तर पुष्ट और हलका होता है। बचपन में तो अनेक