रतिरहस्य: असली कोकशास्त्र (पण्डित कोक्कोक - कामकला, दाम्पत्य-जीवन एवं सम्पूर्ण रति-विज्ञान)
Rati Rahasya or Asli Koka Shastra of Kokkoka with Hindi Commentary
पण्डित कोक्कोक (भाषा टीकाकार: पण्डित कन्हैयालाल) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंअसली कोकशास्त्र ३८३
अहार विचार
फलाहार, दुग्धाहार, अन्नाहार, माँसाहार, रक्ताहार, मृतिका-
हार, काष्ठाहार, रसाहार, पवनाहार इस प्रकार मिलाकर नौ प्रकार
के आहार होते हैं। ये उपरोक्त आहार संसारी जीवों के हैं। जिनमें
से पहले के चार प्रसिद्ध और उत्तर के पाँच अप्रसिद्ध हैं। इस लिए
हम उलटी ओर से विचार करेंगे।
पवनाहार
सर्प का मुख्य आहार पवन है। वह मिट्टी और ओस भी
चाटता है। ऐसा अनुभवी लोगों का कहना है कि—
सर्पा पिवन्ति पवनं न च दुर्बलाःते,
कन्दैर्फलैर्मु निवराः क्षपयन्तिकालम् ।
इत्यादि वचनों से सर्प का पवनभक्षी होना स्पष्ट सिद्ध होता
है। इसी प्रकार गोजर, कानसलाई, बिच्छू आदि भी वायु-भक्षी
हैं। ये बड़े हितकारी जीव हैं क्योंकि वायु में रहने वाला विष ही
इनकी खुराक है, जो हम लोगों के शरीर से मल-मूत्र और श्वासादि
द्वारा निकला हुआ विष वायु में मिला होता है उसे ही ये खाते हैं
इसी लिए ये गन्दे स्थानों पर ही रहते हैं और साफ स्थानों पर नहीं।
यदि आप अपने घर साफ सुथरे रक्खेंगे तो वे वहाँ नहीं आयेंगे,
क्योंकि वहाँ उनकी खुराक नहीं मिलती। जब नये अन्न शाक-पात