सामग्री पर जाएँ
सर्वकोश
रतिरहस्य: असली कोकशास्त्र (पण्डित कोक्कोक - कामकला, दाम्पत्य-जीवन एवं सम्पूर्ण रति-विज्ञान)

रतिरहस्य: असली कोकशास्त्र (पण्डित कोक्कोक - कामकला, दाम्पत्य-जीवन एवं सम्पूर्ण रति-विज्ञान)

Rati Rahasya or Asli Koka Shastra of Kokkoka with Hindi Commentary

पण्डित कोक्कोक (भाषा टीकाकार: पण्डित कन्हैयालाल) द्वारा

DevanagariHindipublished440 पृष्ठ

पृष्ठ 394, कुल 440 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 394

३८२ असली कोकशास्त्र
स्वल्प होना चाहिए जो केवल जठराग्नि की सहायता से ही हजम
हो जाय । जैसे थोड़ा गर्म दूध थोड़ी चीनी डालकर धीरे-धीरे घूँट
घूँट कर पीना चाहिए। दवाई को छोड़कर रात को अधिक गर्म
दूध न पीना चाहिए क्योंकि उत्तेजना पैदा कर वह स्वप्नदोष भी
पैदा कर देता है।
ताजा भोजन
भोजन सदैव ताजा करना उत्तम है। बासी अन्न तमोगुणी
होकर बल, बुद्धि और आयु का हरने वाला है तथा रोगकर भी
होता है। इस लिए सर्वथा त्याज्य है। ताजा भोजन अवश्य हो
किन्तु अत्यन्त गरम न होना चाहिए, कवोष्ण (थोड़ा गरम)
अर्थात् शरीर की गर्मी के समान गरम हो। लोग बहुत गरम
भोजन करते, और उस पर अत्यन्त शीतल जल, गरमी के दिन हों
तो बरफ़ डालकर पीते हैं। वे बहुत ही बुरा करते हैं। क्योंकि
गरम भोजन से दाँत गरम हो जाते हैं और उन पर ठण्डा पानी
लगने पर गरम, सर्द मसूड़े हो जाते हैं। जिसका परिणाम यह होता
है कि असमय ही दाँत हिलकर गिर जाते हैं। दूसरे पानी भी
अधिक पीने में आता है जिससे बहज़मी रोग उत्पन्न हो जाता है।
ठण्डा भोजन करने से अधिक ठण्डा पानी पीने की विशेष इच्छा
नहीं होती और न अधिक पीने में ही आता है। गरम रोटी ठीक
चबाने में भी नहीं आती जो देर-हजम और अजीर्णता उत्पन्न करती है।