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सर्वकोश
रतिरहस्य: असली कोकशास्त्र (पण्डित कोक्कोक - कामकला, दाम्पत्य-जीवन एवं सम्पूर्ण रति-विज्ञान)

रतिरहस्य: असली कोकशास्त्र (पण्डित कोक्कोक - कामकला, दाम्पत्य-जीवन एवं सम्पूर्ण रति-विज्ञान)

Rati Rahasya or Asli Koka Shastra of Kokkoka with Hindi Commentary

पण्डित कोक्कोक (भाषा टीकाकार: पण्डित कन्हैयालाल) द्वारा

DevanagariHindipublished440 पृष्ठ

पृष्ठ 385, कुल 440 में से

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पृष्ठ 385

असली कोकशास्त्र ३७५
स्वास्थ्य-रक्षा के नियम
१—हर एक खाद्य पदार्थ दाँतों से इतना अधिक पीसकर
खाओ कि उसमें लार पैदा हो जाय । वह शीघ्र पचनेवाला पौष्टिक
और स्वास्थ्यप्रद होता है ।
२—मशीन का आटा तत्त्व-हीन कब्ज करने वाला होने से
रोगकर है और हाथ की चक्की का आटा बल-पुष्टि देनेवाला सुपच
तथा पेट साफ रखने वाला होने से निरोग है ।
३—मशीन में साफ किये चावलों का पोषक तत्त्व निकल
जाता है । इस लिए इस प्रकार की चीजों का खाना निरर्थक है ।
४—आग पर पकाये पदार्थों की अपेक्षा स्वयं सूर्य ताप से पके
पदार्थ अधिक लाभकर होते हैं, जैसे फल आदि ।
५—भोजन के आदि और अन्त में केवल आचमन मात्र
करना चाहिए और इससे अधिक पानी पीना हानिप्रद है । भोजन
के मध्य में थोड़ा जल पीना चाहिए ।
६—जिनको पेट की शिकायत रहती हो उनको पाखाना जाने
के आध घण्टा पूर्व आध सेर पानी पीकर टहल लेना चाहिए । इस
नियम से उनकी शिकायत जाती रहेगी ।
७—सब दालों की अपेक्षा अरहर की दाल देर हजम है ।
८—सब आहारों की अपेक्षा दुग्धाहार उत्तम आहार है तथा
दुग्धाहार की अपेक्षा फलाहार और भी उत्तम है ।