रतिरहस्य: असली कोकशास्त्र (पण्डित कोक्कोक - कामकला, दाम्पत्य-जीवन एवं सम्पूर्ण रति-विज्ञान)
Rati Rahasya or Asli Koka Shastra of Kokkoka with Hindi Commentary
पण्डित कोक्कोक (भाषा टीकाकार: पण्डित कन्हैयालाल) द्वारा
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९—तमाखू, बीड़ी, सिगरेट, गाँजा, चरस, भाँग, शराब,
चाय, काफी आदि जितने मादक द्रव्य हैं, इनको भूलकर भी कभी
सेवन न करे। ये उत्तेजक और स्वास्थ्य बिगाड़ने वाले हैं ।
१०—जब तक पहला भोजन अच्छी प्रकार हजम होकर पेट
साफ न हो जाय तब तक दूसरा भोजन कभी न खाय। इस प्रकार
करने से कभी पेट खराब नहीं होगा ।
११—जिनकी पाचन-शक्ति निर्बल पड़ गयी हो वे निरन्तर
गदरे ( अधकचरे ) फलों का सेवन करें। उनमें फिर यथार्थ-शक्ति
लौट आयगी ।
१२—फलों के पूर्ण पक जाने पर उनमें शक्तियों का हास
आरम्भ हो जाता है अतएव स्वास्थ्य के लिए गदरे अर्थात् अधपके
फल ही अधिक लाभदायक हैं ।
१३—बथुआ, सोआ, पालक आदि हरे शाक-पात सूखे आलू
लौकी आदि की अपेक्षा अधिक शरीर-पोषक और हितकर होते हैं।
छिलकेदार तरकारी अधिक लाभदायक होती है। हरएक शाक को
मन्द-मन्द आंच से अपने ही पानी में गला देना अच्छा है ।
१४—दिन में थोड़ा-थोड़ा कर अनेक बार जल पीना चाहिए ।
जिसका कुल परिमाण तीन सेर तक होना उचित है ।
१५—भूख प्यास लगने पर भोजन और जल का सेवन अवश्य
करना चाहिए। नहीं तो स्वास्थ्य बिगड़ता है ।
१६—पाखाना, पेशाब, जम्हाई, नींद और छींक रोक देने से