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सर्वकोश
रतिरहस्य: असली कोकशास्त्र (पण्डित कोक्कोक - कामकला, दाम्पत्य-जीवन एवं सम्पूर्ण रति-विज्ञान)

रतिरहस्य: असली कोकशास्त्र (पण्डित कोक्कोक - कामकला, दाम्पत्य-जीवन एवं सम्पूर्ण रति-विज्ञान)

Rati Rahasya or Asli Koka Shastra of Kokkoka with Hindi Commentary

पण्डित कोक्कोक (भाषा टीकाकार: पण्डित कन्हैयालाल) द्वारा

DevanagariHindipublished440 पृष्ठ

पृष्ठ 383, कुल 440 में से

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पृष्ठ 383

असली कोकशास्त्र १७३
दिनभर में दो-तीन बार नास लेने से भी रुधिर का गिरना बन्द
हो जाता है। अथवा फिटकिरी का पानी सूँघे।
यदि नाक में कीड़े पड़ गये हों तो पिंडोल मिट्टी की डली कूट
कर रोगी के मुख पर एक कपड़ा डाल उसी के ऊपर वह मिट्टी
रख दे। आँख बन्द कराकर उसके मस्तक पर भी मिट्टी डाल दे।
बाद धीरे-धीरे उसके ऊपर पानी छिड़के। जब मिट्टी तर हो जाय,
तब पानी छिड़कना बन्द कर दे। इस मिट्टी की सोंधी महक नाक
में जाने से कीड़े बाहर निकल आते हैं। तीन-चार दिन ऐसा करने
से सब कीड़े निकल जाते हैं और रोगी आराम हो जाता है।
—०—
विषूचिका
यदि बालक को हैजा हो जाय तो उसकी दवा बड़ी सावधानी
से करनी चाहिए और सबसे अधिक ध्यान उसकी सफाई पर रखना
चाहिए। कै या दस्त होने पर फोरन उस स्थान को अँगोठी से
तप्त कर देना बहुत ही आवश्यक है इससे हैजे के विषैले कीड़े
मर जाते हैं—बढ़ने नहीं पाते। वमन होने पर उस स्थान को
लीपना बहुत ही बुरा है।
१—प्याज का अर्क सालभर के बच्चे को पाव तोला पन्द्रह-
पन्द्रह मिनट के बाद दस्त-कै बन्द न होने तक देना चाहिए जब
दस्त और कै बन्द हो जाय तब धीरे-धीरे इसे भी दो-तीन खुराक