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सर्वकोश
रतिरहस्य: असली कोकशास्त्र (पण्डित कोक्कोक - कामकला, दाम्पत्य-जीवन एवं सम्पूर्ण रति-विज्ञान)

रतिरहस्य: असली कोकशास्त्र (पण्डित कोक्कोक - कामकला, दाम्पत्य-जीवन एवं सम्पूर्ण रति-विज्ञान)

Rati Rahasya or Asli Koka Shastra of Kokkoka with Hindi Commentary

पण्डित कोक्कोक (भाषा टीकाकार: पण्डित कन्हैयालाल) द्वारा

DevanagariHindipublished440 पृष्ठ

पृष्ठ 376, कुल 440 में से

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पृष्ठ 376

३६६ असली कोकशास्त्र
विकार के कारण ही बालकों को हुआ करता है। माता के उदर में
बालक जिस रुधिर से पलता है, उसी के विकार से शीतला रोग
होता है।
यह रोग छुआछूत से भी हो जाता है। यदि घर में एक बच्चे
को यह रोग हो जाय तो घरवालों का कर्त्तव्य है कि वे घर के और
बच्चों को चेचक-रोगी के पास हर्गिज न जाने दें और सयानी
खियाँ ही स्वतंत्रता के साथ रोगी की सेवा किया करें। इसे रोकने
के लिए सबसे अच्छा ओर सरल उपाय तो टीका लगवाना है।
टीका लग जाने पर शीतला निकल जाने की बहुत कुछ आशंका जाती
रहती है। ऐसी दशा में यदि यह रोग होता भी है तो अधिक जोर
दार नहीं होता।
शीतला रोग साधारणतया दो प्रकार का होता है यहाँ पर
भेदोपभेद लिखने की आवश्यकता नहीं है। अतः उस उलझन में
न पड़कर रोग का यत्न बतलाना ही विशेष प्रयोजनीय है।
कचनार वृक्ष की छाल के क्वाथ में एक रत्ती सोनामक्खी
भस्म बुरक कर बालक को पिलाने से भोतर बढ़ो हुई शोतला शीघ्र
बाहर निकल आती है। तुलसी की पत्तियां खिलाने से भी शीतला
बाहर निकल आती है। तुलसो को पत्तियों की धूप भो शोतला
रोगी को लाभ पहुँचाती है।
चेचक की बीमारी में उड़द की दाल और मीठा नहीं खिलाना
चाहिये। माता को भी इन चीजों से बचकर ठंढी चीजों का सेवन