रतिरहस्य: असली कोकशास्त्र (पण्डित कोक्कोक - कामकला, दाम्पत्य-जीवन एवं सम्पूर्ण रति-विज्ञान)
Rati Rahasya or Asli Koka Shastra of Kokkoka with Hindi Commentary
पण्डित कोक्कोक (भाषा टीकाकार: पण्डित कन्हैयालाल) द्वारा
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जोरों से चलने लगता है। ऐसी दशा में किसी अच्छे डाक्टर से
मसूड़ों को चिरवा देना बड़ा ही लाभदायक है। इससे बालक का
कष्ट बहुत ही कम हो जाता है और दाँत जल्द निकल आते हैं।
इन्हीं दिनों बच्चों के कान के पीछे गिल्टी भी निकल आती
है। उस गिल्टी को गरम पानी में दूध डालकर धो देना चाहिए।
इस समय बालक का आहार भी घटा देना चाहिए।
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संग्रहणी
यदि बालक को खिलायी-पिलायी चीज हजम न हो तो आधी
छटाँक खाने का चूना परात में रखकर पतला धार से उसके ऊपर
ढाई सेर पानी का तरेग दे; ऐसा करने से सब चूना पानी में मिल
जाता है। दो घण्टे के बाद जब चूना नीचे बैठ जाय तब उस पानी
को दूसरे बर्तन में निथार ले। आधे घण्टे के बाद फिर दोबारा इस
पानी को किसी साफ बर्तन में निथारे—ताकि चूने का जरा भी
अंश पानी में न रह जाय। फिर यही जल थोड़ा-थोड़ा बालक के
दूध में मिलाकर पिलाया करे। इससे बालक की उल्टी और फटे
दस्तों का आना बन्द हो जाता है।
अजवाइन, सफेद जीरा, सोंठ मिर्च, छोटी पीपल और कूड़े
की छाल का चूर्ण शहद के साथ चटाने से भी बालकों की संग्रहणी
बहुत जल्द नष्ट हो जाती है।