रतिरहस्य: असली कोकशास्त्र (पण्डित कोक्कोक - कामकला, दाम्पत्य-जीवन एवं सम्पूर्ण रति-विज्ञान)
Rati Rahasya or Asli Koka Shastra of Kokkoka with Hindi Commentary
पण्डित कोक्कोक (भाषा टीकाकार: पण्डित कन्हैयालाल) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंअसली कोकशास्त्र ३६३
लिए उत्तम उपाय यह है कि शहद में सुहागा और नमक पीसकर
मिला दे और फिर उसे मसूड़ों पर दिन भर में कई बार चुपड़ दिया
करे। अथवा मुलहठी छीलकर बालक के गले में बांध दे, जिसमें
वह उसको चूसा करे।
दाँत निकलते समय बालक को खट्टी चीज न खिलावे। इस
समय यदि माता स्तन-पान न करावे तो बड़ा ही अच्छा हो। इसके
छुड़ाने का सरल उपाय यह है कि माता चार-छः दिन भोजन कम
करे जिसमें दूध का उतरना बन्द हो जाय और छः माशे सफेद खरी
और चार रत्ती कपूर पानी में पीसकर स्तनों पर मल दिया करे।
दस-बारह दिन ऐसा करने से बालक अपने अपने-आप ही दूध
पीना छोड़ देता है। परन्तु गाय का दूध बालक को मजे में पिला
दिया करे और अन्न कम खिलावे। मजे में पिलाने का यह मतलब नहीं
है कि ऐसा पिला दे जिससे बच्चे को अपच हो जाय—जैसा कि
आजकल बहुधा स्त्रियाँ करती हैं। यदि दांत निकलते समय बालक
को दस्त होने लगें तो बहुत ही उत्तम हो। हां, यदि अधिक दस्त
आते हों तो बेलगिरी और रूमी मस्तगी मिलाकर जरा-जरा सा
खिला देना चाहिए।
कभी-कभी बालक को इसमें बड़ा कष्ट होता है। मसूड़े लाल
होकर फूल आते हैं, गरम रहते हैं, दर्द करते हैं, दूध नहीं पिया
जाता, कण्ठ सूखा रहता है, ज्वर हो आता है, हर वक्त चेहरा लाल
रहता है, सोते-सोते बालक चिहुँक कर रोने लगता है और पेट