सामग्री पर जाएँ
सर्वकोश
रतिरहस्य: असली कोकशास्त्र (पण्डित कोक्कोक - कामकला, दाम्पत्य-जीवन एवं सम्पूर्ण रति-विज्ञान)

रतिरहस्य: असली कोकशास्त्र (पण्डित कोक्कोक - कामकला, दाम्पत्य-जीवन एवं सम्पूर्ण रति-विज्ञान)

Rati Rahasya or Asli Koka Shastra of Kokkoka with Hindi Commentary

पण्डित कोक्कोक (भाषा टीकाकार: पण्डित कन्हैयालाल) द्वारा

DevanagariHindipublished440 पृष्ठ

पृष्ठ 372, कुल 440 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 372

३६२ असली कोकशास्त्र
दाँत निकलना
दाँतो का निकलना जब प्रारम्भ होता है, तब बालकों को बड़ा
कष्ट होता है। प्रायः सात-आठ महीने की आयु में दाँत का निक-
लना शुरू होता है। इस समय तरह-तरह के विकार पैदा होते हैं
बहुत सी माताएं अपनी मूर्खता के कारण इस बात पर ध्यान ही
नहीं देतीं कि ये सब उपद्रव दांत निकलने के हैं ओर वे अंट-संट
औषधियाँ करने में लग जाती हैं। जिसका परिणाम बहुत ही बुरा
होता है। दाँत निकलते समय बड़ी सावधानी से काम लेना चाहिए
जब बालक के दाँत निकलने वाले होते हैं, तब साधारणतया ये
लक्षण दिखलायी पड़ते हैं:—
१—बालक के मुख से लार गिरने लगती है और उसके मसूड़े
गरम और लाल हो जाते हैं।
२—बच्चा अपनी अंगुलियों को चबाता है। प्यास अधिक
लगती है। इसीसे वह बार-बार दूध पीने को करता है परन्तु
पिलाने पर पीता नहीं। माता का स्तन मुख में ले-लेकर छोड़ दिया
करता है।
३—रोते समय उसके गालों का रंग लाल हो जाता है।
४—किसी-किसी बच्चे को दस्त भी होने लगता है।
जब ये लक्षण दिखलायी पड़े, तो समझना चाहिए कि अब
बहुत जल्द दाँत निकलने वाले हैं। सुगमता से दाँत निकलने के