रतिरहस्य: असली कोकशास्त्र (पण्डित कोक्कोक - कामकला, दाम्पत्य-जीवन एवं सम्पूर्ण रति-विज्ञान)
Rati Rahasya or Asli Koka Shastra of Kokkoka with Hindi Commentary
पण्डित कोक्कोक (भाषा टीकाकार: पण्डित कन्हैयालाल) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंअसली कोकशास्त्र ३६१
यह दवा भी कान के दर्द को बहुत शीघ्र हर लेती है।
स्त्री के दूध में रसोत घिसकर उसमें शहद मिला, कान में
डालने से कान का बहना, बदबू, पीड़ा, कर्णशूल से होने वाला शिर
दर्द आदि रोग फौरन अच्छे हो जाते हैं।
लोध को महीन पीसकर कान में डाल देने से कान का बहना
और दर्द होना बन्द हो जाता है।
लड़के वाली स्त्री के दूध की चार-पाँच बूँदे कान में टपका
देने से कान का दर्द आसानी से मिट जाता है।
यदि कान के इर्द-गिर्द सूजन हो तो वटवृक्ष की जटा को तीन
दाने काली मिर्च के साथ पीसकर आग पर गरम कर ले और
कपड़े पर रखकर उसका रस कान में टपका दे। थोड़ा सा कान के
आस-पास भी लगा देना चाहिए। दिनभर में तीन-चार बार डालने
से कान का रोग दूर होने लग जाता है।
यदि कान बहता हो तो हाइड्रोजन पराक्साइड अंग्रेजी दवा है)
से साफ कर डालना चाहिए। कान की पीड़ा में भी इस दवा से
काम लेना बड़ा ही लाभदायक है; क्योंकि इससे कान की सब मैल
फूल जाता है और रुई से बड़ी सरलता पूर्वक बाहर निकल आती है।
बहुत से बच्चों के कान में बहुधा पोड़ा हुआ करती है। इस
लिए ऐसे बच्चों पर सदा इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि
लकड़ी से कान खोदते तो नहीं; कारण यह कि कान खोदने से
बहुत जल्द उसमें रोग पैदा हो जाता है।