रतिरहस्य: असली कोकशास्त्र (पण्डित कोक्कोक - कामकला, दाम्पत्य-जीवन एवं सम्पूर्ण रति-विज्ञान)
Rati Rahasya or Asli Koka Shastra of Kokkoka with Hindi Commentary
पण्डित कोक्कोक (भाषा टीकाकार: पण्डित कन्हैयालाल) द्वारा
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पित्त ज्वर
सिरयाई, नीलोफर, गम्भारी, गिलोय, पद्मकाष्ठ और पित्त-
पापड़ा का क्वाथ बालकों के पित्त-ज्वर को दूर भगाता है। नागर-
मोथा, पित्तपापड़ा, खस, नेत्रवाला, पद्मकाष्ठ का क्वाथ ठण्ढा
करके पिलाने से प्यास, दाह, वमन और ज्वर का शीघ्र नाश हो
जाता है।
बाँसा, पित्तपापड़ा, खस, नीम की छाल, चिरायता इनके क्वाथ
का सेवन कराने से वमन, श्वास-कास और पित्त ज्वर दूर होता है।
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अन्य ज्वर
हरड़ की छाल, आँवला, पीपल छोटी, चीता इनके सेवन से
सन्निपात ज्वर और कफ ज्वर नष्ट हो जाता है। इन चारों चीजों
का योग बड़ा ही पाचक और दस्तावर है।
काली मिर्च, कायफल, काकड़ासिंगी, पोखरमूल, छोटी पीपल
इन चीजों में से एक या दो को अथवा सबको लेकर चूर्ण बनावे।
बाद उस चूर्ण को अदरक के रस और शहद के साथ चटाने से
बालक का कफ ज्वर, अरुचि, श्वास और शूल नष्ट हो जाता है।
फालसा, कमलनाल, धान की खील और मिश्री को रात में
भिगो दे। सबेरे कपड़े से छानकर शहद मिलाकर पिलाने से बालक
का वात-पित्त-ज्वर, दाह, प्यास, मूर्च्छा, अरुचि, भ्रम रक्त-पित्त