रतिरहस्य: असली कोकशास्त्र (पण्डित कोक्कोक - कामकला, दाम्पत्य-जीवन एवं सम्पूर्ण रति-विज्ञान)
Rati Rahasya or Asli Koka Shastra of Kokkoka with Hindi Commentary
पण्डित कोक्कोक (भाषा टीकाकार: पण्डित कन्हैयालाल) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंअसली कोकशास्त्र १५७
त्रिदोष ज्वर
पद्म काष्ठ, नीम की छाल, गिलोय और लाल चन्दन इन द्रव्यों
का क्वाथ बालक और उसकी माता को पिलाने से त्रिदोष के ज्वर
का शमन होकर खूब अच्छी भूख लगता है ।
गिलोय को आठ पहर तक भिगो रक्खे, बाद उसे पीसकर
पिलाने से बालक के सब तरह के ज्वर का बहुत जल्द नाश हो
जाता है ।
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वात ज्वर
शालपर्णी, गोखरू, सोंठ, नेत्रवाला, छोटी बड़ी कटेरी की जड़
और चिरायता का क्वाथ पिलाने से बालक का वात ज्वर बहुत
शीघ्र दूर हो जाता है । यह काढ़ा बालक और उसकी माँ दोनों को
पिलाना चाहिए । लघुपंचमूल के क्वाथ का सेवन करने से भी
वात ज्वर नष्ट होता है । (लघुपंचमूल में पांच चीजें हैं—शाल-
पर्णी, पृष्ठपर्णी, छोटी कटेरी, बड़ी कटेरी और गोखरू ।)
मुनक्का, गिलोय, सिरयाई, खरेंटी का क्वाथ भी वात ज्वर को
नष्ट कर देता है ।
खस, लाल चन्दन, सिरयाई, गिलोय, नीलोफर, पद्म काष्ठ,
फालसा, मुलहठी, गम्भारी और धनियां का क्वाथ पीने से भी वात
ज्वर जड़ से साफ हो जाता है ।