रतिरहस्य: असली कोकशास्त्र (पण्डित कोक्कोक - कामकला, दाम्पत्य-जीवन एवं सम्पूर्ण रति-विज्ञान)
Rati Rahasya or Asli Koka Shastra of Kokkoka with Hindi Commentary
पण्डित कोक्कोक (भाषा टीकाकार: पण्डित कन्हैयालाल) द्वारा
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जाता है और मुख धुँधला पड़ जाता है; साँस अधिक चलती है
और आँतों से आवाज निकलती है।
बच्चों को खाने की दवा तीन प्रकार से दी जाती है। दूध पीने
वाले बच्चे को यदि दवा देनी होती है तो दूध पिलाने वाली को दवा
दी जाती है, जिससे उसका असर दूध में आ जाता है और स्तन-
पान करने वाला बच्चा निरोग हो जाता है। दूध और अन्न दोनों से
जो बच्चे निर्वाह करते हैं, उनकी यदि चिकित्सा करनी होती है तो
माँ बच्चे दोनों को दवा दी जाती है। बालकों को दवाएँ माता के
दूध या शहद में घिसकर दी जाती हैं, इसका सदा ध्यान
रखना चाहिए।
बच्चों को बहुधा नीचे लिखे रोग होते हैं:—
नाल पकना
यदि नाल खींचने के कारण पक जाय तो मोम का मरहम
कपड़े पर लगाकर या कपड़े को कड़वे तेल या नारियल के तेल में
भिगोकर लगा देना चाहिए। यदि नाल में सूजन हो तो पीली
मिट्टी को आग में गरम करके दूध डालकर बाफ देना उचित है
अथवा साफ और नयी रुई से सेंक दे। अथवा बकरी की लेंड़ी
जलाकर उसकी राख को नाभि पर चिपका देना चाहिए। या हल्दी
लोध, मेहँदी, मुलहठी इनको तेल में पका कर नाभि पर लगाना
चाहिए।
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